उद्योग और सेवाओं ने अर्थव्यवस्था में समग्र विकास को आगे बढ़ाने में जुड़वा इंजन के रूप में कार्य किया है। वे समपूर्ण विश्व से बड़ी मात्रा में पूंजी और विदेशी निवेश के अंतर्वाह को आकर्षित कर रहे हैं। वे राष्ट्र के सामाजिक आर्थिक विकास को त्वरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उसके द्वारा विभिन्न श्रेणी के माल और सेवाएं प्रदान करते हैं (मूर्त और अमूर्त दोनों) और आम जनता की विविध आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं। ये क्षेत्रक देश में रोजगार अवसर के सबसे बड़े सृजक हैं और अन्य देशों के साथ वयपार और वाणिज्य के सुविधाकारक हैं। दूसरे शब्दों में कृषि के अलावा वे लगभग सभी नीतिगत पहलों, प्रोत्साहनों और स्कीमों तथा कार्यक्रमों और योजनाओं, के लिएराष्ट्रीय और राज्य दोनों स्तरों पर आधार हैं।
औद्योगिक क्षेत्रक में मुख्य रूप से भारी और छोटे इंजीनियरिंग, इस्पात, ऑटोमोटिव, जैव प्रौद्योगिकी, औषध और भेषज, खाद्य प्रसंस्करण, खान और खनिज, उर्वरक आदि शामिल हैं जो अर्थव्यवस्था में पर्याप्त बाजार अवसंरचना विकास के लिए अपार क्षमता प्रदान करते हैं। ये उद्योग अनेकानेक अच्छी गुणवत्ता एवं कौशल गहन उत्पाद के उत्पादन, भारी मात्रा में और बहुत अधिक उचित कीमतों पर उत्पादन करने में रते हैं। उनका प्रशासन और नियंत्रण अपने संबंधित मंत्रालयों/विभागों द्वारा किया जाता है। तथापि, औद्योगिक विकास और संवर्धन विभाग (डीआईपीपी), वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन सामान्य रूप से समस्त औद्योगिक विकास और उत्पादन पर निगरानी रखने के लिए मुख्य अभिकरण है। यह निरंतर औद्योगिक प्रौद्योगिकी में अंतरराष्ट्रीय विकास के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए भारतीय उद्योग के आधुनिकीकरण और प्रौद्योगिकी उन्नयन के लिए योजना बनाता है। कुल विशिष्ट औद्योगिक क्षेत्रक जैसे सीमेंट, छोटे इंजीनियरिंग क्षेत्रक आदि में प्रौद्योगिकी विकास की आवश्यकता का अध्ययन, मूल्यांकन और पूर्वानुमान करता है। डीआईपीपी भारतीय उद्योग के विकास को अपनाने और सुकर बनाने के लिए समय-समय पर औद्योगिक नीति की घोषणा करता रहता है। ऐसी नीतिगत ढांचा देश में व्यापार के लिए कुछ सीमाएं और मानदंड निर्धारित करता है।
सेवा क्षेत्रक कॉरर्पोरेट जगत के लिए हमेशा के आकर्षक निवेश विकल्प रहा है। इसने देश में अनेकानेक अवसंरचना सुविधाओं के सृजन को सुकर बनाया है तथा विभिन्न उद्योगों की उत्पादकता को बढ़ाया है। यह न केवल समाज के आर्थिक उत्थान में सहायता करता है अपितु जन समुदाय के बीच राजनैतिक और सामाजिक खुशहाली का भी संवर्धन करता है। सेवा उद्योग में सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), शिक्षा, स्वास्थ्य, मीडिया, पर्यटन आदि शामिल हैं, जो विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर जनता के मत का निर्माण करते हैं तथा नीतियों/योजनाओं/कार्यक्रमों/आयोजनाओं के निर्माण में उनको भागीदारी की भूमिका देकर उनकी जागरूकता बढ़ाते हैं। दूसरे शब्दों में एक देश सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में सेवाओं की अधिकाधिक संवर्धन के बिना उच्च वृद्धि दर हासिल नहीं कर सकता है। तदनुसार संबंधित प्राधिकरण स्थायी तौर पर क्षेत्रक के विकास की गति सुदृढ़ करने के लिए सभी प्रयास कर रहे हैं।
भारतीय औद्योगिक ढांचा का एक महत्वपूर्ण वर्ग सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमईएस) रहा है जो विश्व भर में अर्थव्यवस्था में समान विकास संवर्धन करने के लिए स्वीकार किया गया है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय भारत के लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय भारत के लघु और मध्यम क्षेत्रक के समग्र विकास के लिए जिम्मेदार है। इसने क्षेत्रक को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है और तदनुसार उनके हितों की रक्षा करने के लिए अनेकों पहल किया है जैसा कि उनके द्वारा विशिष्ट रूप से विनिर्माण करने के लिए मदों का आरक्षण। उद्योग के मुख्य लाभ हैं श्रम उन्मुखी प्रकृति, उच्चतर रोजगार वृद्धि दर का सृजन करना तथा कम पूंजी लागत पर उत्पादन। एमएसएमईएस अर्थव्यवस्था में जिसकी बड़ी संख्या में उद्यम हैं जो औद्योगिक उत्पादन और निर्यातों के बड़े हिस्से के लिए योगदान करते हैं।
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