पशुपालन और डेयरी राज्य का विषय है और क्षेत्र के विकास के लिए राज्य सरकारें प्रमुख रूप से जिम्मेदार है। लाखों ग्रामीण परिवारों के लिए डेयरी आय और रोजगार का द्वितीयक महत्वपूर्ण स्रोत बन गया है। भारतीय डेयरी उद्योग 9वीं योजना के बाद ठोस विकास गति पायी है और इसने 2005-06 के दौरान 97.1 मिलियन टन का वार्षिक उत्पादन हासिल किया है। वर्ष 2006-2007 के दौरान भारत का दुग्ध उत्पदन 100.9 मिलियन टन के स्तर पर पहुंच गाया है। इस न केवल देश को विश्व में शीर्ष पर रखा है परन्तु देश की बढ़ती जनसंख्या के लिए दुग्ध और दुग्ध उत्पाद की उपलब्धता में स्थायी विकास दर्शाता है।
भारत सरकार दुधारु जानवरों की उत्पादकता बढ़ाने के प्रयास कर रही है इस प्रकार से प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता बढ़ेगी। अधिकांश दूध का उत्पादन छोटे किसानों, सीमांत किसानों और भूमि हीन मजदूरों द्वारा किया जाता है जो ग्रामीण स्तर पर सहकारिताओं में समूहबद्ध हैं। उन्हें स्थायी बाजार मुहैया कराने और दुग्ध उत्पाद के लिए परिलब्धात्मक कीमत दिलाने के लिए देश में लगभग 12 मिलियन किसानों को एक लाख से अधिक ग्रामीण स्तरीय सहकारी समितियों की परिधि में लाया गया है।
कृषि मंत्रालय के अधीन पशु पालन, डेयरी और मत्स्य पालन विभाग मवेशी उत्पादन, संरक्षण, रक्षा और पशु सुधार, डेयरी विकास तथा दिल्ली दुग्ध योजना और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड से संबंधित मामलों के लिए जिम्मेदार हैं। यह मछली पकड़ने और मत्स्य पालन से संबंधित सभी मामलों की देख रेख भी करता है जिसमें अंतर्देशीय और समुद्री क्षेत्र और राष्ट्रीय मत्स्यिकी विकास बोर्ड से संबंधित मामले शामिल है।
विभाग राज्य सरकारों को पशु रोग नियंत्रण, वैज्ञानिक प्रबंधन और आनुवांशिक संसाधनों का उन्नयन, पोषक चारा और पशु चारा की बढ़ती उपलब्धता, प्रसंस्करण और विपणन सुविधाओं का स्थायी विकास और मवेशियों और मत्स्यिकी उद्यमों की उत्पादकता एवं लाभदायकता बढ़ाने के लिए सहायता प्रदान करते आया है। राज्य सरकारों में अलग विभाग गठित किए है जो राज्य में पशुपालन और डेयरी कार्य के विकास के लिए जिम्मेदार हैं।