कृषि तथा सहबद्ध क्षेत्रों को भारतीय अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार माना जाता है। वे कच्ची सामग्री के महत्वपूर्ण स्रोत तथा कई औद्योगिक उत्पादों विशेषत: उर्वरकों, कीटनाशियों, कृषिक औजारों तथा अनेक प्रकार की उपभोक्ता वस्तुओं के लिए मांग में हैं। भारत के सकल घरेलू उत्पाद में उनका योगदान लगभग 22 प्रतिशत है। लगभग 65-70 प्रतिशत जनसंख्या अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है।
''कृषि तथा सहबद्ध'' उद्योग को आगे अनेक खंडों में विभाजित किया गया है, नामत: उद्यानकृषि तथा इसके सहबद्ध क्षेत्रक (फलों तथा सब्जियों, फूलों, रोपण फसलों, मसालों, सुगंधित तथा चिकित्सीय पौधों सहित); मत्स्यिकी क्षेत्र, पशुपालन तथा पशुधन; तथा रेशम पालन उद्योग। भारत की विविध कृषि-जलवायु दशाएं भारी संख्या में उद्यान कृषि फसलों की संवृद्धि के लिए अत्यधिक अनुकूल है जिनका 160.75 मिलियन टन के उत्पादन के साथ देश के सकल फसलीकृत क्षेत्र में लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा है।
भारत विश्व में फलों और सब्जियों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। चीन के पश्चात फूलों का भी यह दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। यह मसालों तथा रोपण फसलों जैसे चाय, काफी इत्यादि का भी अग्रणी उत्पादक, उपभोक्ता तथा निर्यातक है, जबकि रेशम उद्योग एक कृषि आधारित कुटीर उद्योग है। भारत का विश्व के प्रमुख कच्चे रेशम उत्पादक के रूप में दूसरा स्थान है।
मत्स्यिकी क्षेत्र का देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। यह देश में भारी संख्या में लोगों, विशेषतया ग्रामीण जनसंख्या के लिए रोज़गार अवसरों का एक बड़ा स्रोत है। इसकी भारी निर्यात संभाव्यता है। इसी प्रकार, भारत में पशुधन तथा मुर्गी पालन के विशाल संसाधन है जो ग्रामीण जनसाधारण के कल्याण के संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारतीय डेयरी उद्योग ने 9वीं योजना से पर्याप्त संवृद्धि संवेग हासिल किया है।
वर्ष 2006-2007 के दौरान भारत का दुग्ध उत्पादन 100.9 मिलियन टन (अनंतिम) के स्तर पर पर पहुंच गया जिससे विश्व में इस क्षेत्र में हमारे देश का स्थान सबसे ऊपर हो गया है।
कृषि मंत्रालय कृषि, उद्यान कृषि, मत्स्य उद्योग, पशु पालन इत्यादि से जुड़े क्रियाकलापों के विनियमन तथा विकास के लिए भारत का मुख्य प्राधिकरण है। यह ''कृषि और सहकारिता विभाग'' तथा ''पशुपालन, डेयरी उद्योग तथा मत्स्यिकी विभाग'' जैसे अपने प्रभागों के माध्यम से इस क्षेत्र के लिए विभिन्न योजनाओं तथा नीतियों को क्रियान्वित कर रहा है। इसके अतिरिक्त, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मत्स्य प्रसंस्करण तथा फल एवं वनस्पति प्रसंस्करणके खंडों में उद्यमकारिता क्रियाकलापों के संवर्धन में सक्रिय रूप से रत है। इसके अतिरिक्त, वस्तु बोर्ड जैसे टी बोर्ड, कॉफी बोर्ड, रबर बोर्ड, चिकित्सीय पौधे बोर्ड इत्यादि की स्थापना क्रमश: चाय, कॉफी, रबर, चिकित्सीय पौधों जैसे क्षेत्रों की संवृद्धि को बढ़ावा देने के लिए की गई है।
इस प्रकार, कृषि तथा सहबद्ध क्षेत्रों में असंख्य व्यवसाय अवसर विद्यमान हैं। विश्व भर से निवेशक इसकी विद्यमान संभाव्यताओं का लाभ उठाने तथा दोहन न किए गए क्षेत्रों का अन्वेषण करने के लिए इस क्षेत्र में अधिकाधिक निवेश कर रहे हैं।