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Entrepreneurship in Agriculture & Allied Sectors
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Entrepreneurship in Agriculture & Allied Sectors
Promotion of Agriculture & Allied Sectors
बागवानी और संबद्ध क्षेत्र: बागानी फसलें:
सिंहावलोकन
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वर्ष 2005-06 पौधरोपण फसलों का कुल उत्‍पादन 3.11 मिलियन हेक्‍टेयर से लगभग 10.39 मिलियन मीट्रिक टन था। भारत काजू का सबसे बड़ा उत्‍पादक और उपभोक्‍ता है। वर्ष 2006-07 के दौरान कुल बागवानी उत्‍पादन के 6.5 प्रतिशत योगदान पौधरोपण फसलों में दिए गए।

1. चाय: वर्ष 2002-03 से रूकावट के बाद पुन: स्थिति सुधारते हुए चाय का उत्‍पादन आरंभ किया गया और तब से इसके उत्‍पादन में एक धनात्‍मक वृद्धि बनी हुई है। सरकार ने पुन: पौधरोपण और नवजीवन देने की गतिविधियों के लिए एक विशेष प्रयोजन चाय कोष का गठन किया है जिसका लक्ष्‍य चाय बगानों की आयु रूपरेखा में सुधार करना है। यह योजना 567.1 करोड़ रु. के एक अनुमानित परिव्‍यय (476.1 करोड़ रु. की सब्सिडी तथा 91.0 करोड़ रु. पूंजीगत योगदान के प्रति) सहित 11वीं पंचवर्षीय योजना के अंत तक कार्यान्‍वयन हेतु अनुमोदित की गई है, जो सरकार द्वारा दिया जाना है। इस अवधि के दौरान पुन: पौधरोपण / नवजीवन देने की गतिविधियों के लिए अनुमानित क्षेत्रफल 85,044 हेक्‍टेयर होगा जिसमें 68,154 हेक्‍टेयर भूमि पर पुन: पौधरोपण तथा 16,890 हेक्‍टेयर पर नवजीवन प्रदान करने का भाग शामिल है। इन सभी से न केवल उत्‍पादकता के स्‍तरों में सुधार होगा बल्कि इससे बेहतर प्राप्ति पाने की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। 29 जून 2007 को 33 बंद हो चुके चाय बागानों के लिए 38.65 करोड़ रु. की सीमा तक वित्तीय राहत प्रदान करने के एक पुनर्वास पैकेज की घोषणा की गई थी। तब से इनमें से 10 बागान खुल चुके हैं

वर्ष उत्‍पादन निर्यात आयात घरेलू खपत (ख)
मात्रा मात्रा मूल्‍य मात्रा मूल्‍य मात्रा
2002-03 845.97 184.4 1665.04 22.49 105.32 693
2003-04 878.65 183.07 1636.99 11.34 66.23 714
2004-05 906.84 205.81 1924.71 32.53 145.15 735
2005-06 948.94 196.67 1793.58 17.41 102.77 757
2006-07 947.12 218.15 2045.72 20.78 110.88 771
2007-08 (क) 805.18 100.87 998.68 11.80 76.16 N.A.
(अप्रैल-नवम्‍बर) (अप्रैल-नवम्‍बर) (अप्रैल-नवम्‍बर) (अप्रैल-नवम्‍बर) (अप्रैल-नवम्‍बर)  

मात्रा : मिलियन कि. ग्रा. में; करोड़ रु. में

(क) अनुमानित; (ख) कैलेंडर वर्ष से संबंधित;

(स्रोत: वाणिज्‍य और उद्योग मंत्रालय)

2. कॉफी: कॉफी के उत्‍पादन में अब तक रूकावट का दौर पूरा नहीं हुआ है, तथापि 2005-06 में 2.7 लाख टन की आंशिक वृद्धि 2006-07 में 2.9 लाख टन हो गई है। जबकि भारत विश्‍व के कुल उत्‍पादन का केवल 4 प्रतिशत योगदान देता है, फिर भी भारतीय कॉफी ने अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में अपने लिए एक विशेष स्‍थान बना लिया है, विशेष रूप से भारतीय खरीदार, जो अपनी मिश्रण की गुणवत्ता के लिए उच्‍च वरीयता प्राप्‍त हैं। भारत से अरेबिका कॉफी को भी अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में भली भांति स्‍वीकार किया जाता है। कॉफी की कम कीमतों से कॉफी उगाने वालों की समस्‍याओं के शमन के लिए कई कदम उठाए गए हैं, जिसमें कॉफी उगाने वाले को ऋण तथा ब्‍याज की पुन: संरचना शामिल हैं (छोटे स्‍तर पर उगाने वालों को 5 प्रतिशत तथा बड़े स्‍तर पर उगाने वालों को 3 प्रतिशत की सब्सिडी वित्तीय संस्‍थानों से उनकी कार्यशील पूंजी के लिए गए ऋण पर उपलब्‍ध हैं)। कॉफी क्षेत्र के लिए निर्दिष्‍ट मशीनरी पर आयात कर कम किया गया है ताकि उद्योग काफी की उत्‍पादकता और गुणवत्ता में सुधार ला सके। मौसम ( बारिश) का बीमा एग्रीकल्‍चर इंश्‍योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लि. के सहयोग से कॉफी उगाने वालों को एक जोखिम प्रबंधन सहायता के रूप में देने की योजना भी कार्यान्वित की गई है।

वर्ष उत्‍पादन निर्यात घरेलू खपत
(लाख टन) (लाख टन) (करोड़ रु.) (मिलियन अमेरिकी डॉलर) (लाख टन)
2000-01 3.01 2.47 1374 243 0.60
2001-02 3.01 2.14 1050 216 0.64
2002-03 2.75 2.07 1051 234 0.68
2003-04 2.71 2.33 1158 262 0.70
2004-05 2.76 2.12 1225 295 0.75
2005-06 2.74 2.02 1510 353 0.80
2006-07 2.88 2.49 1016 453 0.80
2007-08 (a) 2.62 1.2 1062 253 0.85

(क) अनुमानित;

(स्रोत : आर्थिक सर्वेक्षण 2007-08)

3. प्राकृतिक रबर: भारत वर्ष 2006 के दौरान विश्‍व भर के उत्‍पादन में 8.8 प्रतिशत की हिस्‍सेदारी के साथ प्राकृतिक रबर का चौथा सबसे बड़ा उत्‍पादक है। वर्ष 2002-03 में 5.7 लाख हेक्‍टेयर से लगभग 8 प्रतिशत की वृद्धि से प्राकृतिक रबर पौधरोपण का क्षेत्रफल वर्ष 2006-07 में 6.2 लाख हेक्‍टेयर हो गया। इस अवधि के दौरान प्राकृतिक रबर के उत्‍पादन में 31 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसकी उत्‍पादकता 1,87 9 किलो ग्राम प्रति हेक्‍टेयर के उच्‍चतम स्‍तर पर पहुंच गई, जो वर्ष 2006 के दौरान प्रमुख प्राकृतिक रबर उत्‍पादक देशों में भी उच्‍चतम था। वर्ष 2006-07 के दौरान देश से 89,699 टन के निर्यात की तुलना में प्राकृतिक रबर के 56,545 टन का निर्यात किया गया। प्राकृतिक रबर का निर्यात घरेलू मांग - आपूर्ति के संतुलन को समायोजित करने की एक कार्यनीति के रूप में और अंतरराष्‍ट्रीय मानकों के साथ अनुरूपता में उत्‍पादन के संसाधन की आवश्‍यकता पर उगाने वालों को शिक्षित करने के लिए संकल्पित किया गया है।

वर्ष क्षेत्रफल उत्‍पादन उत्‍पादकता निर्यात आयात खपत
(हे.) (टन) (कि.ग्रा. /हे.) (टन) (टन) (टन)
2002-03 569667 649435 1592 55,311 26,217 695425
2003-04 575980 711650 1663 75,905 44,199 719600
2004-05 584090 749665 1705 46,150 72,835 755405
2005-06 597610 802625 1796 73,830 45,285 801110
2006-07 (क) 615200 852895 1879 56,545 89,699 820305
2007-08 (ख) 630000 819000 1784 - - 857000

(क) अनंतिम (ख) अनुमानित;

(स्रोत : आर्थिक सर्वेक्षण 2007-08)

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