सभी व्यापारिक संगठनों में कुछ जोखिम के तत्व शामिल हैं। जोखिम से अभिप्राय लाभों की अनिश्चितता, या भविष्य में अनुमान न लगाई गई किसी घटना के कारण हानि का खतरा है। उद्यमी व्यापार के प्रत्येक क्षेत्र या कार्य में जोखिमों से रुबरु हो सकता है। उदाहरण के लिए उत्पादन में, कच्ची सामग्री की नियमित आपूर्ति के कारण जोखिम हो सकता है, मशीनरी का खराब होना, श्रम की थकावट आदि, विपणन में मूल्य उतार-चढ़ाव के कारण जोखिम हो सकता है, प्रवृत्ति और फैशन में परिवर्तन, बिक्री पूर्वानुमान में गलती, व्यापार चक्र आदि। इसके अतिरिक्त आग, बाढ़, भूकम्प, दंगे, युद्ध या राजनीतिक अशान्ति के कारण परिसम्पत्तियों की हानि हो सकती है, जिससे व्यापार के संचालन में अनचाहा हस्तक्षेप हो सकता है। इस तरह से व्यापार जोखिम कई रूपों में आ सकता है। यद्यपि जोखिम सार्वभौमिक हैं परन्तु सब व्यापार उद्यम एक ही प्रकार के और एक ही डिग्री के जोखिम का सामना नहीं करते है। उनमें व्यापार की प्रकृति और आकार के अनुसार भिन्नता होती है।
व्यापार में ये जोखिम अपरिहार्य हैं और पूरी तरह उन्हें समाप्त नहीं किया जा सकता है परन्तु जोखिम प्रबंधन के रोकथाम और सुधारात्मक उपायों के जरिए नियंत्रित किया जा सकता है। जोखिम प्रबंधन की प्रक्रिया में निम्नलिखित शामिल हैं :-
अत: उद्यमी उनकी प्रकृति एवं कारणों का अंदाजा लगाकर जोखिमों का प्रभावी तरीके से सामना कर सकता है और उनके नकारात्मक परिणामों को कम करने के लिए उपयुक्त तकनीकी अपनाकर ऐसा कर सकता है।
और व्यापार में लाभ भी इन जोखिमों से अभिन्न रूप से जुड़े हुए हैं। दूसरे शब्दों में जहां जोखिम नहीं वहां लाभ नहीं व्यापार का मौलिक सिद्धांत है। इसलिए बड़े कारोबारी प्रतिष्ठानों का अधिक लाभ अपने उद्यमियों द्वारा कारोबारी जोखिमों का सफलतापूर्वक निपटाने के पुरस्कार हैं।