Spacer
 
Spacer
  Business.gov.in Indian Business Portal
An Initiative of India.gov.in
 
 
तीव्र मीनू
 
Growing Business
spacer
starting a Business व्‍यापारी जोखिम
starting a Business संयुक्‍त उद्यम
starting a Business संयुक्‍त कार्यालय खोलना
starting a Business विलयन और अधिग्रहण
starting a Business वित्तीय सहायता
starting a Business विनियामक अपेक्षाएं
   
 
Growing A Business
Growing A Business
संयुक्‍त उद्यम

संयुक्‍त उद्यम एक नया उद्यम है जिसका स्‍वामी दो या अधिक प्रतिभागी होते हैं। यह परिसम्‍पत्तियों के सबसेटों का मिश्रण हैं जिसका अंशदान दो (या अधिक) व्‍यापारी कम्‍पनियों द्वारा विशिष्‍ट प्रयोजन और सीमित अवधि के लिए किया जाता है। यह अनिवार्य रूप से मझोले से लेकर दीर्घकालीन संविदा होती है जो विशिष्‍ट और लचीला होता है। यद्यपि, संयुक्‍त उद्यम नया सृजित व्‍यापारी उद्यम का द्योतक है, इसके प्रतिभागियों का अस्तित्‍व अलग फर्म के रूप में जारी रहता है, एक निगम के रूप में या व्‍यापारी संगठन के किसी अन्‍य रूप में जिसका प्रतिभागी फर्म चयन करना चाहती हैं। साधारणत: इसकी निम्‍नलिखित विशेषताएं हैं :-

  • साझेदारी द्वारा, रुपए, सम्‍पत्ति, प्रयास, ज्ञान, कौशल या सामान्‍य उपक्रम की अन्‍य परिसम्‍पत्ति का अंशदान।
  • उद्यम के विषय वस्‍तु में संयुक्‍त सम्‍पत्ति हित।
  • उद्यम का पारस्‍परिक नियंत्रण या प्रबंधन का अधिकार
  • सम्‍पत्ति में भागीदारी का अधिकार।

इस प्रकार से संयुक्‍त उद्यमों की संभावना और अवधि सीमित होती है। उनमें प्रत्‍येक साझेदार के कार्यकलापों का बहुत ही छोटा हिस्‍सा शामिल होता है। प्रत्‍येक साझेदार के पास कुछ विशिष्‍ट होता है और उद्योग को देने के लिए महत्‍वपूर्ण होता है, साथ-साथ दूसरे भागीदार को लाभ का स्रोत प्रदान करता है। तथापि प्रतिभागियों का प्रतिस्‍पर्द्धी संबंध का संयुक्‍त उद्यम की व्‍यवस्‍था से प्रभावित होना आवश्‍यक नहीं हैं।

संयुक्‍त उद्यम के लाभ

संयुक्‍त उद्यम पुनर्गठन की प्रक्रिया में कम्‍पनियों की सहायता करने में महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। यह फर्म को नए क्षेत्र में समय के विस्‍तार के साथ प्रवेश करने नए उत्‍पाद बाजार में प्रवेश और विकास नए भौगोलिक क्षेत्रों में विस्‍तार करने और नए प्रौद्योगिकीय प्रेरित कार्यकलापों में भाग लेने में समर्थ बनाता है। उनका उपयोग इसी प्रकार के फर्मों द्वारा रक्षात्‍मक रूप में बड़े दायरे की रणनीति योजना के रूप में भी किया जा सकता है। इस प्रकार से एक छोटी फर्म बहुत अधिक सघनता वाले उद्योग में अन्‍तरा संतुलित बलों के स्‍व रक्षात्‍मक नेटवर्क का‍ निर्माण करने के लिए अनेकानेक उद्योगों के प्रबल फर्मों के साथ संयुक्‍त उद्यम के लिए बातचीत कर सकती है। संयुक्‍त उद्यमों का गठन अनेकानेक उद्देश्‍यों के लिए किया जाता है :-

  • मुख्‍य उद्देश्‍य जोखिम को कम करना है। यह कई तरह से जोखिम कम करता है चूंकि स्‍वतंत्र वित्तपोषण करने की अपेक्षा कार्यकलापों को विस्‍तार अपेक्षाकृत छोटे परिव्‍यय से किया जा सकता है।
  • अधिकांश संयुक्‍त उद्यमों का उल्लिखित उद्देश्‍य जानकारी प्राप्‍त करना है। साझेदारों के बीच संविदात्‍मक संबंध के निर्धारण में अंतरण किया जाने वाला ज्ञान की जटिलता मुख्‍य कारके है। एक या अधिक प्रतिभागी अपेक्षाकृत नए उत्‍पाद बाजार कार्यकलाप के बारे मे जानना चाहते हैं। इसका संबंध कार्यकलाप के सभी पहलुओं से है या सीमित खंड जैसे अनुसंधान और विकास उत्‍पादन विपणन या उत्‍पाद सेवा।
  • नए उत्‍पाद विचार के साथ एक छोटी फर्म जिसमें अधिक जोखिम शामिल हैं और जिसके लिए निवेश पूंजी की बड़ी राशि की आवश्‍यकता है वह बड़े फर्म के साथ संयुक्‍त उद्यम का गठन कर सकती है। अपेक्षाकृत बड़ी फर्म वित्तीय जोखिम उठाने में समर्थ होगी और नए व्‍यापार कार्यकलाप में शामिल हो सकती हैं जिससे विकास और लाभदायकता की गुंजाइश है। इसके अतिरिक्‍त बड़ी फर्म इसके द्वारा कार्यकलाप के नए क्षेत्रों में अनुभव प्राप्‍त कर सकता है जो भविष्‍य में मुख्‍य व्‍यापार की तीव्रता के लिए मुख्‍य नए व्‍यापार के लिए अवसर का द्योतक हो सकता है।
  • बहुत से संयुक्त उद्यमों में कर लाभ, महत्‍वपूर्ण कारक हैं।
  • यह फर्म के कार्यों का विस्‍तार विदेशों में करने में भी सहायता करता है स्‍थानीय साझेदार स्‍थानीय परिस्थितियों के बारे में विशेष जानकारी के रूप में योगदान देते हैं जो उद्यम की सफलता के लिए अनिवार्य हैं।

संयुक्‍त उद्यम को अनेकानेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। चूंकि परिस्थितियां बदलने से अपेक्षित समायोजन करने के लिए अनुमत होने हेतु संविदा अत्‍यधिक लचीली हो सकती हैं :-

  • संयुक्‍त उद्यम की असफलता के मूल कारण निम्‍नलिखित हैं :-
  • संयुक्‍त उद्यम के लिए अपर्याप्त पुनर्योजना।
  • प्रत्याशित प्रौद्योगिकी का कभी विकास नहीं होता।
  • संयुक्त उद्यम के मूल उद्देश्‍यों का समाधान करने के लिए वैकल्पिक तरीकों पर सहमति नहीं हो सकती है।
  • एक कम्‍पनी में विशेषज्ञता वाले लोग संयुक्‍त उद्यम में अपनी जानकारी प्रतिपक्ष को देने से इनकार करते हैं।
  • मुश्किल मुद्दों पर मुख्‍य कम्‍पनियां नियंत्रण या समझौता बांटने में असमर्थ होती हैं।

सफल संयुक्‍त उद्यम को निम्‍नलिखित अपेक्षाएं पूरी करने की आवश्‍यकता है :-

  • प्रत्‍येक प्रतिभागी को कुछ मूल्‍य संयुक्‍त उद्यम में लाना है।
  • प्रतिभागियों को सावधानीपूर्वक पुन: योजना में रत होना चाहिए।
  • करार या संविदा को भवि‍ष्य के लिए लोच प्रदान करना चाहिए।
  • एक प्रतिभागी द्वारा खरीदने सहित बर्खास्‍तगी के लिए करार में प्रावधान होना चाहिए।
  • संयुक्त उद्यम के कार्यान्वयन के लिए मुख्य कार्यपालक को जिम्‍मेदारी दी जानी है।
  • संगठनात्मक ढांचा में एक विशिष्ट एकक का सृजन किया जाए जिसका अधिकर बातचीत करने और निर्णय लेने के लिए हो।

विदेशी कम्‍पनियों द्वारा संयुक्‍त उद्यम

विदेशी कम्‍पनी संयुक्‍त उद्यम करार (या पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी कम्‍पनी) के जरिए भारतीय कम्‍पनी में निवेश कर सकती है, यह ऐसे क्षेत्रों में निवेश कर सकती है जो अन्‍यथा सार्वजनिक क्षेत्रक के लिए आरक्षित नहीं है या जो प्रतिबंधित श्रेणी के अंतर्गत नहीं आते हैं जैसाकि स्‍थावर सम्‍पदा, बीमा, कृषि और बागवानी। भारत में विदेशी निवेश विदेशी प्रत्‍यक्ष निवेश नीति (एफडीआई) और विदेशी विनिमय प्रबंधन अधिनियम, 1999 (फेमा) के द्वारा शासित होता है। निवेश तकनीकी सहयोग और संयुक्‍त उद्यमों के लिए अपेक्षित मूल सूचना एवं किसी प्रकार की सहायता के लिए सिंगल विंडो एजेंसी के रूप में वित्त मंत्रालय में सरकार ने भारतीय निवेश केन्‍द्र स्‍थापित किया है। औद्योगिक और विदेशी निवेश नी‍तियों, कराधान संबंधी कानून और सुविधाओं एवं प्रोत्‍साहनों के बारे में सूचना मुहैया कराता हैं और भारत में सहयोगियों को चिन्‍हांकित करने में उनकी सहायता करता है।

भारत में ऐसे विदेशी निवेश के लिए द्विस्‍तरीय अनुमोदन तंत्र की व्‍यवस्‍था की गई है :-

  • स्‍वत: अनुमोदन मार्ग : एफडीआई को स्‍वत: मार्ग के अधीन क्षेत्रों या कार्यकलापों के लिए कुछ हद तक भारत सरकार या भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा किसी अनुमोदन की आवश्‍कता नहीं होती है। निवेशकों को आवाक प्रेषण की प्राप्ति के 30 दिनों के भीतर आरबीआई के संबंधित कार्यालय को अधिसूचित करने की आवश्‍यकता है और‍ विदेशी निवेशकों को शेयर जारी होने के 30 दिनों के भीतर उस कार्यालय में अपेक्षित दस्‍तावेज फाइल करने की आवश्‍यकता होती है।
  • विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) अनुमोदन मार्ग : स्‍वत: अनुमोदन मार्ग के अंतर्गत शामिल न किए गए कार्यकलापों में एफडीआई के लिए पूर्व सरकारी अनुमोदन की आवश्‍यकता होती है। और उन पर विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) द्वारा विचार किया जाता है। एफआईपीबी की स्‍थापना वित्त मंत्रालय में देश में एफडीआई अंतर्वाह का संवर्धन करने तथा उपयुक्‍त संस्‍थागत व्‍यवस्‍था प्रदान करने, निवेश संवर्धन के लिए पारदर्शी प्रक्रियाएं और दिशानिर्देश देने और विदेशी निवेश के लिए अनुशंसाओं पर विचार करने/अनुमोदन करने के लिए की गई है। मिश्रित प्रस्‍तावों जिनमें विदेशी निवेश शामिल हैं या विदेशी तकनीकी सहयोग भी एफआईपीबी की अनुशंसा से दिए जाते हैं। एफआईपीबी मार्ग के जरिए विदेशी निवेश अनुमोदन प्राप्‍त करने वाली कम्‍पनी को आवक प्रेषण प्राप्‍त करने और विदेशी निवेशकों को शेयरों के निर्गम को लिए आईबीआई से और किसी प्रकार की मंजूरी की आवश्‍यकता नहीं होती है। एफआईपीबी को भेजे जाने वाले प्रस्‍तावों में निम्‍नलिखित सूचना शामिल होगी :-

    • क्या आवेदक का भारत में उसी क्षेत्र में कोई मौजूदा वित्तीय या तकनीकी सहयोग या ट्रेड मार्क करार हैं जिसके लिए अनुमोदन मांगा गया है; और
    • यदि हां, तो उसका ब्यौरा और नया उद्यम या तकनीकी सहयोग के प्रस्‍ताव को न्‍यायसंगत बनाने के कारण;
    • आवेदन विदेशों में भारतीय मिशन में जमा किया जा सकता है जो आगे के प्रक्रियान्‍वयन के लिए आर्थिक कार्य विभाग को अग्रेषित करेंगे;
    • आर्थिक कार्य विभाग में प्राप्‍त किए गए विदेशी निवेश प्रस्‍तावों को साधारणत: प्राप्ति के 15 दिनों के भीतर विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) के समक्ष रखा जाता है।

औद्योगिक सहायता सचिवालय (एलआईए) का भी भारत सरकार द्वारा वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय में उद्यम संबंधी सहायता हेतु सिंगल विन्‍डो सहायता मुहैया कराने के लिए निवेशकों की सुविधा और सभी आवेदन प्राप्‍त एवं प्रक्रियान्वित करने जिनके लिए सरकारी अनुमोदन की आवश्‍यकता होती है, स्‍थापना की गई है। यह निवेश और प्रौद्योगिकी संबंधी सभी सरकारी नीति निर्णयों को भी अधिसूचित करता है और चुनिंदा उद्योग समूहों के लिए मासिक उत्‍पादन डाटा का संग्रहण करता है।

^ ऊपर

 
संबंधित लिंक्‍स :
भारतीय रिजर्व बैंक
भारतीय निवेश केन्‍द्र
विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी)
वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय
औद्योगिक सहायता सचिवालय (एसआईए)
 
 
Government of India
spacer
 
 
Business Business Business
 
  खोजें
 
Business Business Business
 
Business Business Business
 
मैं कैसे करूँ
Business कम्‍पनी पंजीकरण करूं
Business नियोक्‍ता के रूप में पंजीकरण करें
Business केन्‍द्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) में शिकायत भरें
Business टैन कार्ड के लिए आवेदन करें
Business आयकर विवरणी भरें
 
Business Business Business
 
Business Business Business
 
  हमें सुधार करने में सहायता दें
Business.gov.in
हमें बताएं कि आप और क्‍या देखना चाहते हैं।
 
Business Business Business
Business
Business Business Business
 
निविदाएं
नवीनतम शासकीय निविदाओं को देखें और पहुंचें...
 
Business Business Business
Business
Business Business Business
 
 
व्यापार चिह्न
Business
कॉपीराइट
Business
पेटेंट प्रपत्र
Business
अभिकल्पन हेतु प्रपत्र
 
 
Business Business Business
 
 
 
Spacer
Spacer
Business.gov.in  
 
Spacer
Spacer