उद्यमी अपने व्यापार का यातो आंतरिक विस्तार या बाहय विस्तार द्वारा विकास कर सकता है। आंतरिक विस्तार के मामले में फर्म धीरे-धीरे लंबे समय में विकसित होता है जो व्यापार के सामान्य काल में नई परिसम्पत्तियों का अधिग्रहण, औद्योगिक रूप से बेकार उपकरणों का प्रतिस्थापन और नए उत्पादों को स्थापित कर सकता है। परन्तु बाहय विस्तार में, फर्म कार्यरत व्यापार का अधिग्रहण करना और तुरन्त कॉरर्पोरेट के मिश्रण द्वारा विकसित हो जाता है। ये मिश्रण विलयन के रूप में अधिग्रहण, सम्मामेलन, और कब्जा करने के रूप में होते हैं और अब कॉरर्पोरेट पुनर्गठन की महत्वपूर्ण विशेषता बन गया है। वे दुनिया भर में असंख्य अग्रणी कम्पनियों के बाहय विकास में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहे हैं। वे लोकप्रिय हो गए हैं चूंकि प्रतिस्पर्द्धा में वृद्धि हुई, व्यापार बंधन टूट चुका है, देशों के बीच पूंजी का मुक्त प्रवाह और व्यापार का वैश्विकरण हो गया है। आर्थिक सुधार होने से भारतीय उद्योग भी अपने मुख्य कारोबारी कार्यकलापों के ईर्द-गिर्द अधिप्राप्ति और अधिग्रहण के जरिए अपना कार्य पुनर्गठित करना आरंभ कर दिया है यह उनके देशीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों की क्षेत्रों में प्रतिस्पर्द्धा में खुलाव का विस्तार के कारण हुआ है।
विलयन और अधिग्रहण रणनीतिक है जो कम्पनी के उत्पादन और विपणन कार्य बढ़ाकर इसके विकास को अधिकतम करने के लिए जाते हैं। उनका उपयोग विस्तृत क्षेत्रों में किया जा रहा हैं जैसाकि सूचना प्रौद्योगिकी, दूरसंचार, और व्यापारी प्रक्रिया का बाहय स्रोतन एवं पारम्परिक व्यापार में ताकि इसके द्वारा सुदृढ़, विस्तार और ग्राहक आधार, तीव्र प्रतिस्पर्द्धा या नए बाजार या उत्पाद खंड में प्रवेश किया जा सके।
विलयन या समाम्मेलन
विलयन दो या अधिक व्यापार को एक व्यापार में मिलाना है। भारत के कानून में विलयन के लिए समाम्मेलन शब्द का उपयोग किया जाता है। आयकर अधिनियम, 1961 (धारा 2 (1क) में समाम्मेलन की परिभाषा एक या अधिक कम्पनी का दूसरे में विलयन के रूप में या दो या अधिक कम्पनियों का नई कम्पनी के गठन के लिए दूसरी कम्पनी में विलयन के रूप में पारिभाषित किया गया है यह इस तरह से किया जाता है कि समाम्मेलित होने वाली कम्पनियों की सभी परिसम्पत्तियां और दायित्व समाम्मेलित कम्पनी की परिसम्पत्तियां और दायित्व होते हैं और समाम्मेलित कम्पनी में शेयरों के मूल्य का दस में से नौवां भाग से कम न हो ऐसे शेयरधारक या कम्पनियां समाम्मेलित कम्पनी के शेयर धारक होती हैं।
इस प्रकार से विलयन का समाम्मेलन के दो रूप होते हैं :-
- समावेशन के जरिए विलयन :- समावेशन दो या अधिक कम्पनियों का मौजूदा कम्पनी में मिश्रण है। एक को छोड़कर सभी कम्पनियां अपनी पहचान खोती हैं। उदाहरण के लिए टाटा केमिकल्स लिमिटेड (टीसीएल) द्वारा टाटा फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (टीएफएल) का समावेशन। टीसीएल जो अधिग्रहण करने वाली कम्पनी है (खरीदार है) विलयन के बाद अपना अस्तित्व रखती है जबकि टीएफएल, जो अधिग्रहित कम्पनी है (बिक्री करने वाली) का अस्तित्व समाप्त हो जाता है। टीएफएल अपनी परिसम्पत्ति दायित्व और शेयर टीसीएल को आंतरिक कर देती है।
- समेकन के जरिए विलयन :- समेकन दो या अधिक कम्पनियों का एक नई कम्पनी में मिश्रण है। विलयन के इस रूप में सभी कम्पनियों का कानूनी तौर पर विलय हो जाता है और एक नई कम्पनी सृजित की जाती है। यहां, अधिग्रहित कम्पनी अपनी परिसम्पत्तियां, उत्तरदायित्व और शेयर नकद या शेयरों के विनिमय में अधिग्रहित करने वाली कम्पनी को अंतरित करती है। उदाहरण के लिए हिन्दुस्तान कम्प्यूटर्स लिमिटेड, इंडियन साफ्टवेयर कम्पनी लि. और इंडियन रिप्रोग्राफिक लि. का विलयन बिल्कुल नई कम्पनी में होना जो एचसीएल लि. कहलाती है।
विलयन की मूलभूत विशेषताएं (या तो समावेशन या समेकन से) यह है कि अधिग्रहण कम्पनी (मौजूदा या नई) अन्य कम्पनियों के स्वामित्व का अधिग्रहण करती है और उनके कार्यों के साथ मिलाती है।
इसके अतिरिक्त तीन मुख्य विलयन के प्रकार हैं :-
- क्षैतिज विलयन :- यह एक ही क्षेत्र या व्यापार में दो या अधिक फर्मों का समिश्रण है। उदाहरण के लिए, प्रबल बाजार शेयर प्राप्त करने के लिए दो पुस्तक प्रकाशकों या दो समान विनिर्माता कम्पनियों को मिला देना।
- अनुलम्ब विलयन :- एक ही उत्पाद को विभिन्न उत्पादन अवस्थाओं में रत दो या अधिक कम्पनियों का समिश्रण शामिल होता है। उदाहरण को लिए टीवी विनिर्माता कम्पनी (असेम्बलिंग) और टीवी विपणन कम्पनी को मिलाना या सूत कातने वाली कम्पनी और बुनकर कम्पनी को मिलाना। अनुलम्ब विलयन अग्रणी या पिछड़ा विलयन का रूप ले सकता है। जब कम्पनी सामग्री आपूर्तिकर्ता के साथ मिलाई जाती है यह पिछड़ा विलयन कहलाता है और जब यह ग्राहक के साथ मिश्रित की जाती है यह अग्रणी विलयन के रूप में जाना जाता है।
- संगुटिका विलयन :- यह असंबंधित व्यापार में लगे हुए फर्मों का समिश्रण है। उदाहरण के लिए विभिन्न व्यापार जैसे विनिर्माण सीमेंट उत्पादों का विनिर्माण, उर्वरक उत्पादों, इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों, बीमा निवेश और विज्ञापन एजेंसियों का विलयन। एल एंड टी और वोल्टास लि. ऐसे विलयन के उदाहरण हैं।
अधिप्राप्ति और अधिग्रहण
अधिप्राप्ति एक कम्पनी द्वारा दूसरी कम्पनी की परिसम्पत्तियों का प्रबंधन पर बिना कम्पनियों को मिलाए ही प्रभावी नियंत्रण करने के रूप में पारिभाषित की गई है। इस प्रकार से अधिप्राप्ति में दो या अधिक कम्पनी स्वतंत्र रह सकती है उनकी अलग कानूनी कम्पनी हो सकती है परन्तु कम्पनी के नियंत्रण में परिवर्तन हो सकता है। जब अधिप्राप्ति जबरदस्ती या अनिच्छा से की जाती है यह अधिग्रहण कहलाता है। अनिच्छा अधिप्राप्ति में लक्ष्य कम्पनी को प्रबंधन अधिग्रहण किए जाने का विरोध करेगी। परन्तु अधिप्राप्ति और लक्ष्य कम्पनियों का प्रबंधन अधिग्रहण के लिए परस्पर स्वेच्छा पूर्वक सहमत होती है तो यह अधिप्राप्ति या मैत्रिक अधिग्रहण कहलाता है।
एकाधिकार और प्रतिबंधित प्रणाली अधिनियम के अंतर्गत अधिग्रहण का अर्थ कम्पनी के 25 प्रतिशत से अधिक मताधिकार का अधिग्रहण करना है। जबकि कम्पनी अधिनियम (धारा 372), में यह वर्णन है कि किसी दूसरी कम्पनी के शेयरों में अंशदायी पूंजी के 10 प्रतिशत से अधिक कम्पनी का निवेश के परिणामस्वरूप अधिग्रहण हो सकता है। अधिप्राप्ति या अधिग्रहण आवश्यक रूप से पूर्ण कानूनी नियंत्रण नहीं देता है। एक कम्पनी दूसरी कम्पनी पर अल्पसंख्यक स्वामित्व के द्वारा प्रभावी रूप से नियंत्रण कर सकती है।
विलयन और अधिप्राप्ति के लाभ
विलयन और अधिप्राप्ति के अति सामान्य लक्ष्य एवं लाभ निम्नलिखित हैं :-
- कम्पनी के विकास को त्वरित करना, विशेषकर संसाधनों के अभाव में जब इसकी आंतरिक विकास बाधित होता है। आंतरिक विकास के लिए यह आवश्यक है कि कम्पनी अपनी कार्यचाल सुविधा, विनिर्माण, अनुसंधान, विपणन आदि का विकास करे। परन्तु विकास के लिए आवश्यक संसाधनों और समय के अभाव से कम्पनी की विकास गति में बाधा उत्पन्न होना है। इसलिए, कम्पनी विलयन और अधिप्राप्ति के माध्यम से बाहर से उत्पादन सुविधाएं और प्राप्त करती है। विशेषकर नए उत्पाद/बाजार में प्रवेश करने के लिए कम्पनी के पास तकनीकी कौशल की कमी हो सकती है और इसके लिए विशेष विपणन कौशल की आवश्यकता हो सकती है और बाजार के विभिन्न खण्डों में पहुंच के लिए विस्तृत वितरण नेटवर्क की आवश्यकता होती है। कम्पनी मौजूदा कम्पनी या कम्पनियों की अधिप्राप्ति कर सकती है जिसमें अपेक्षित आधारभूत संरचना एवं कौशल हो, और शीघ्रता से विकसित हो सकती है।
- लाभदायकता बढ़ाना, चूंकि दो या अधिक कम्पनियों का समिश्रण से लागत में कमी आने एवं संसाधनों के अधिकतम उपयोग के कारण औसत से अधिक लाभदायकता हो सकती है। यह निम्नलिखित कारणों से होता है :-
- बड़े पैमाने की किफायतें :- यह तब होती है जब उत्पादन की मात्रा में वृद्धि होने के कारण प्रति यूनिट उत्पादन लागत कम होती है। यह इसलिए होता है चूंकि विलयन हो जाने से नियत लागत बड़ी संख्या में उत्पादनों के बीच वितरित हो जाती है जिसके फलस्वरूप उत्पादन के यूनिट की लागत कम हो जाती है। बड़े पैमाने पर किफायतें अन्य अविभाज्यताओं के कारण भी होती है जैसाकि उत्पादन सुविधाएं, प्रबंधन कार्य और प्रबंधन संसाधन और प्रणालियां। चूंकि कार्य, सुविधा या संसाधन मिश्रित फर्म द्वारा बड़े पैमाने के उत्पादन के लिए प्रयुक्त होते हैं।
- परिचालन किफायतें :- यह इसलिए होता है कि दो या अधिक फर्मों का समिश्रण के परिणाम स्वरूप लागत में कटौती होती हैं क्योंकि यह परिचालन किफायत के कारण होती है। दूसरे शब्दों में समिश्रित फर्म एक दूसरे के ऊपर कार्य से बचता या उसे कम करता है जैसाकि विनिर्माण, विपणन, अनुसंधान और विकास और इस प्रकार से परिचालन लागतें कम करता है। उदाहरण के लिए एक मिश्रित फर्म वितरण को दोहरा चैनल समाप्त कर सकता है या केन्द्रीयकृत प्रशिक्षण केन्द्र का सृजन करता है या एकीकृत योजना और नियंत्रण प्रणाली पुर:स्थापित कर सकता है।
- सहक्रिया :- इसका तात्पर्य वैसी परिस्थिति से है जहां समिश्रित फर्म व्यष्टि समिश्रित फर्मों की तुलना में अधिक मूल्यवान होता है। यह बड़े पैमाने की किफायतों के अलावा लाभों से संबंधित है। परिचालन किफायतें सहक्रिया के लाभों का एक रूप है। परन्तु परिचालन किफायतों के अतिरिक्त, सहक्रिया वर्धित प्रबंधकीय क्षमताओं, सृजनात्मकता, पुनरूद्धार, अनुसंधान और विकास बाजार कवरेज क्षमता, संसाधनों की अनुपुरकता और कौशल और अवसरों के विस्तृत क्षेत्र के कारण भी सक्रियता आती है।
- कम्पनी के जोखिमों का विविधिकरण, विशेषकर यह जब उन व्यापारों की अधिप्राप्ति करती है जिनकी आय प्रवाह परस्पर संबंधित नहीं है। विविधिकरण का अभिप्राय असंबंधित व्यापारों में फर्मों के मिश्रण के जरिए विकास से है। परिचालन की चक्रीयता से ठोस कमी के जरिए कुल जोखिम में कमी के फलस्वरूप यह होता है। प्रबंधन और अन्य प्रणालियों का समिश्रण फर्म की क्षमता बढ़ाता है ताकि अनिश्चित आर्थिक कारकों की गहनता बर्दाश्त की जा सके अन्यथा इससे कम्पनी की उत्तरजीविता को खतरा हो सकता था।
- विलयन के परिणामस्वरूप अनेकानेक तरीकों से वित्तीय सक्रियता और लाभ कम्पनी को हो सकता है :-
- वित्तीय बाधाओं को हटाकर
- ऋण क्षमता बढ़ाने के द्वारा/चूंकि दो कम्पनियों का विलयन नकद प्रवाह स्थिर कर सकता है जो बदले में दिवालियापन का जोखिम कम करता और नई कम्पनी की क्षमता बड़ी ऋण राशि का शोधन करने के निमित बढ़ा सकता है।
- वित्तीय लागत कम करने के द्वारा/चूंकि वित्तीय स्थिरता के कारण विलयित फर्म कम ब्याज दर पर उधार लेने में समर्थ हो जाता है।
- कम्पनी की बाजार शक्ति में अभिवर्धन करके प्रतिस्पर्द्धा की प्रगाढ़ता कम करना। विलयन विलयित फर्म का बाजार शेयर बढ़ा सकता है। यह बड़े पैमाने की किफायतों के कारण फर्म की लाभदायकता में सुधार करता है। श्रम, आपूर्तिकर्ता और खरीदार की तुलना में फर्म की मोल-तोल करने की शक्ति भी बढ़ती है। विलयित फर्म बेकार की जगह नए प्रौद्योगिकी और कीमत प्रतिस्पर्द्धा को दोहन कर सकता है।
विलयनों और अधिप्राप्तियों के लिए निर्णयों के मूल्यांकन की प्रक्रिया
विलयनों और अधिप्राप्तियों के विश्लेषण में शामिल तीन मुख्य चरण इस प्रकार हैं:-
- योजना :- अधिप्राप्ति की योजना के लिए विशिष्ट उद्योग का विश्लेषण और फर्म विशिष्ट सूचना आवश्यक है। अधिग्राही फर्म को अपनी क्षमता और कमियों और कॉरर्पोरेट लक्ष्यों के परिप्रेक्ष्य में अपने लक्ष्य की समीक्षा करनी चाहिए। इसके लिए इसको बाजार वृद्धि, प्रतिस्पर्द्धा की प्रकृति, प्रवेश की सरलता, पूंजी और श्रम की गहनता, विनियमन की डिग्री आदि संबंधी डाटा की आवश्यकता होगी। यह उत्पाद बाजार रणनीति इंगित करने में सहायता करेगा जो कम्पनी के लिए उपयुक्त है। यह व्यापार यूनिटों को चिन्हांकित करने में भी कम्पनी की सहायता करेगा जो छोड़ा या जोड़ा जाना चाहिए। दूसरी ओर लक्षित फर्म को प्रबंधन की गुणवत्ता, बाजार शेयर और आकार, पूंजी ढांचा, लाभदायकता उत्पादन और विपणन क्षमताएं आदि के बारे में सूचना की आवश्यकता होगी।
- खोज-बीन और जांच :- खोज का संकेन्द्रण कैसे और कहां उपयुक्त उम्मीदवार की खोज अधिग्रहण के लिए किया जा सकता है, पर होता है। जांच प्रक्रिया बहुत से उपलब्ध में से कुछ उम्मीदवारों का चयन करती है और उनमें से प्रत्येक के बारे में विस्तृत सूचना प्राप्त करती है।
- वित्तीय मूल्यांकन :- विलयन का वित्तीय मूल्यांकन अर्जन और नकद प्रवाह, जोखिम के क्षेत्रों, लक्षित कम्पनी को देय अधिकतम कीमत और विलयन को वित्तपोषित करने का सर्वोत्तम तरीका का निर्धारण करने के लिए आवश्यक होता है। प्रतिस्पर्द्धी बाजार परिस्थिति में वर्तमान बाजार मूल्य लक्षित फर्म का सही और निष्पक्ष मूल्य होता है। लक्ष्य फर्म अपने शेयरे के वर्तमान बाजार मूल्य से कम किसी पेशकश को स्वीकार नहीं करेगा। लक्ष्य फर्म वास्तव में अपने शेयर के वर्तमान बाजार मूल्य से अधिक कीमत की पेशकश की आशा करेगा चूंक यह आशा कर सकता है कि विलयन का लाभ अधिग्राही फर्म को होगा।
विलयन प्रीमियम में कहा जाता है जब पेशकश की कीमत फर्म की विलयन पूर्व मूल्य से अधिक होता है। अधिग्राही फर्म को प्रीमियम को भुगतान करना होगा यह लक्षित फर्म के शेयरधारकों को प्रोत्साहन के रूप में होगा ताकि अपना शेयर बेचने के लिए प्रवृत्त किया जाए ताकि यह लक्ष्य फर्म का नियंत्रण प्राप्त कर सके।
विलयनों और अधिप्राप्तियों के लिए विनियमन
विलयन और अधिप्राप्तियां भारत में विभिन्न कानूनों के तहत विनियमित होते हैं। कानून का लक्ष्य इन व्यापारों को पारदर्शी बनाना और शेयरधारकों के हितों की रक्षा करना है। उनका विनियमन निम्नलिखित के प्रावधानों द्वारा किया जाता है :-
- कम्पनी अधिनियम, 1956
यह अधिनियम विलयनों और अधिप्राप्तियों के लिए कानूनी प्रक्रियाएं निर्धारित करता है :-
- विलयन की अनुमति :- दो या अधि कम्पनियां केवल तब समामेलित होती हैं जब उनके संघ के ज्ञापन के अधीन समाम्मेलन अनुमत होता है। अधिग्राही कम्पनी को अपने उद्देश्य खंड में अधिग्रहित कम्पनी का व्यापार करते रहने के लिए अनुमति प्राप्त हों। संघ ज्ञापन में इन प्रावधानों के अभाव में, शेयरधारकों, निदेशक मण्डल और कम्पनी विधि बोर्ड से विलयन करने के पहले अनुमति लेना अनिवार्य है।
- स्टॉक एक्सचेंज को सूचना :- अधिग्राही और अधिग्रहित कम्पनियों को विलयन के बारे में स्टॉक एक्सचेंज (जहां वे सूचीबद्ध हैं) सूचित करना चाहिए।
- निदेशक मण्डल का अनुमोदन :- व्यष्टि कम्पनियों के निदेशक मण्डल समाम्मलेन के लिए मसौदा प्रस्ताव को अनुमोदित करेंगे और कम्पनियों के प्रबंधन के प्रस्ताव को आगे अनुशीनन करने के लिए प्राधिकृत करेंगे।
- उच्च न्यायालय में आवेदन :- व्यष्टि कम्पनियों के निदेशक मंडल द्वारा विधिवत रूप से अनुमोदित मसौदा समाम्मेलन प्रस्ताव के लिए आवेदन उच्च न्यायालय में दिया जाना चाहिए।
- शेयरधारकों और सृजों की बैठकें :- व्यष्टि कम्पनियों को अपने शेयरधारकों और ऋणदाताओं की समाम्मेलन स्कीम का अनुमोदन करने के लिए अलग-अलग बैठकें करनी चाहिए। अलग-अलग बैठकों में कम से कम 75 प्रतिशत शेयरधारकों और ऋणदाताओं जो व्यक्तिगत या प्रतिनिधि द्वारा मत देते हैं, स्कीम को अपना अनुमोदन दें।
- उच्च न्यायालय द्वारा मंजूरी :- शेयरधारकों और ऋणदाताओं द्वारा अनुमोदन के बाद कम्पनियों की याचिका पर उच्च न्यायालय एक आदेश पारित करेगा जिसमें स्कीम निष्पक्ष और उचित है कि संतुष्टि होने पर समामेलन की मंजूर होगी। न्यायालय की सुनवाई की तारीख दो समाचार पत्रों में प्रकाशित की जाएगी और कम्पनी विधि बोर्ड के क्षेत्रीय निदेशक को भी इसकी सूचना दी जाएगी।
- न्यायालय आदेश फाइल करना :- न्यायालय आदेश के बाद इसकी अनुप्रमाणित प्रति कम्पनी पंजीयक के पास फाइल की जाएगी।
- परिसम्पत्तियों और दायित्वों का अंतरण :- अधिगृहित कम्पनी की परिसम्पत्ति और दायित्व विनिर्दिष्ट तारीख से अनुमोदित स्कीम के अनुसार अधिग्राही कम्पनी को अंतरित की जाएगी।
- नकद या प्रतिभूतियों के द्वारा भुगतान :- प्रस्ताव के अनुसार अधिग्राही कम्पनी शेयरों और डिबेंचरों/या नकद का विनिमय अधिगृहित कम्पनी के शेयरों और डिबेंचरों से करेगी। इन प्रतिभूतियों को स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध किया जाएगा।
- प्रतिस्पर्द्धा अधिनियम, 2002
यह अधिनियम भारतीय प्रतिस्पर्द्धा आयोग के माध्यम से व्यापारी मिश्रण के विभिन्न रूपों को विनियमित करता है। अधिनियम के तहत कोई भी व्यक्ति या उद्यम अधिप्राप्ति, विलयन या समाम्मेलन के रूप में मिश्रण नहीं कर सकता है जिससे संबंधित बाजार में प्रतिस्पर्द्धा पर उल्लेखनीय प्रतिकूल प्रभाव डालता या इसकी संभावना बनाता है और ऐसा समिश्रिण रद्द हो जाएगा। समिश्रण के लिए इच्छुक उद्यम आयोग को सूचना दे सकते हैं परन्तु यह अधिसूचना स्वैच्छिक है। परन्तु सभी समिश्रणों की जांच नहीं की जाती है जब कि कि प्रतिफल समिश्रण परिसम्पत्तियों और उत्पादन की तर्ज पर भारतीय प्रतिस्पर्द्धा आयोग द्वारा विनिर्दिष्ट सीमाओं से अधिक न हो। समिश्रण विनियमित करते समय आयोग निम्नलिखित कारकों पर विचार करेगा :-
- निर्यातों के माध्यम से वास्तविक और संभावित प्रतिस्पर्द्धा;
- बाजार में प्रवेश बाधाओं का दायरा;
- बाजार में समिश्रण का स्तर;
- बाजार में अंतरावेलिंग शक्ति की डिग्री;
- उल्लेखनीय और महत्वपूर्ण रूप से कीमत या लाभ बढ़ाने के लिए समिश्रण की संभावना;
- बाजार में बने रहने योग्य प्रभावी प्रतिस्पर्द्धा का दायरा;
- समिश्रण के पहले और बाद में स्थानापन्न की उपलब्धता;
- सम्मिश्रण में व्यष्टिगत और समिश्रण के रूप में पक्षों का बाजार शेयर;
- बाजार में बलशाली और प्रभावी प्रतिस्पर्द्धी या प्रतिस्पर्द्धा हटाने के लिए समिश्रण की संभावना;
- बाजार में अनुलम्ब एकीकरण और प्रकृति और दायरा;
- पुनरूद्धार की प्रकृति और दायरा;
- क्या समिश्रण के लाभ समिश्रण के प्रतिकूल प्रभाव से अधिक होता है।
इस प्रकार से प्रतिस्पर्द्धा अधिनियम समिश्रण हटाना नहीं चाहता है और केवल उनके नुकसानदायक प्रभाव को हटाना चाहता है।
- अन्य विनियमों की निम्नलिखित में व्यवस्था की गई हैं :- विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 और आयकर अधिनियम 1961 इसके अतिरिक्त भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने विलयनों और अधिप्राप्तियों को विनियमित करने के लिए दिशानिर्देश जारी किया है। सेबी (शेयरों की स्थायी अधिप्राप्ति और अधिग्रहण) विनियमन, 1997 और इसमें बार में किए गए संशोधनों का लक्ष्य अधिग्रहण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और अल्पसंख्यक शेयरधारकों के हितों की रक्षा करना है।
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