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शाखा कार्यालय खोलना

कम्‍पनी अपना व्‍यापार का विस्‍तार घरेलू देश और अन्‍य देशों के विभिन्‍न भागों में अपनी शाखाएं खोलकर करती है। शाखा कार्यालय का तात्‍पर्य एक प्रतिष्‍ठान से है जो स्‍थायी रूप से वही व्‍यापार और कार्यकलाप जो उसके मुख्‍य कार्यालय द्वारा किया जाता है। ऐसे कार्यालय कम्‍पनी को निम्‍नलिखित तरीके से मदद करता है :-

  1. विभिन्‍न स्‍थानों पर इसका व्‍यापार फैलाना और इस प्रकार ग्राहक आधार पर वृद्धि करना।
  2. इसके उत्‍पादों को उनकी सुलभता बढ़ाकर ग्राहकों के पास लाना।
  3. इसके उत्‍पादों और सेवाओं का वितरण और विपणन अधिक सरल और प्रभावी बनाना।

दूसरे शब्‍दों में, शाखा कार्यालय अधिक ग्राहकों को आकर्षित करके कम्‍पनी के उत्‍पाद के लिए बाजार के आकार के बढ़ाने में सहायता करता, इसके व्‍यापार और विपणन कार्यकलापों की संभावनाओं का विस्‍तार करके तथा इसके लिए अधिक अवसर लाकर एवं अंवेषण के मार्ग खोलकर सहायता करता है। इस प्रकार से ये कार्यालय कम्‍पनी की वृद्धि को ईंधन प्रदान करता और स्‍थायी आधार पर लाभ की उत्‍पादकता बढ़ाता है।

घरेलू कम्‍पनियों द्वारा शाखा कार्यालय खोने की प्रक्रिया

इसकी व्‍यवस्‍था कम्‍पनी अधिनियम, 1956 के तहत की गई है, जिसके अनुसार :-

भारत में नया शाखा कार्यालय खोलने के लिए एक घरेलू कम्‍पनी अपनी बोर्ड बैठक में एक संकल्‍प पारित करना होगा जिसमें यह विनिर्दिष्‍ट हो :-

  • उस विशेष शाखा कार्यालय में व्‍यापार किया जाना है।
  • शाखा के दैनिक कार्यों की देखभाल करने के लिए और उस शाखा के बैंक खाते का संचालन करने के लिए किसी व्‍यक्ति की नियुक्ति।
  • आवास, प्रतिष्‍ठान और अन्‍य अपेक्षाओं की व्‍यवस्‍था करने के लिए किसी व्‍यक्ति को प्राधिकृत करना, जो उस शाखा कार्यालय को चलाने के लिए अनिवार्य है।

इस प्रकार बोर्ड की बैठक में प्राधिकृत व्‍यक्ति को भी कुछ अधिकार दिया जाता है, जो कम्‍पनी की ओर से दिया जाता है, जो निम्‍नलिखित हैं :-

  • शेयरधारकों को उनके शेयरों का भुगतान न किए गए राशि के संबंध में बुलाने की शक्ति;
  • डिबेन्‍चर जारी करने की शक्ति‍;
  • रुपए उधार लेने की शक्‍ति डिबेंन्‍चरों को छोड़कर
  • कम्‍पनी के निधियो को निवेश करने की शक्ति
  • ऋण लेने की शक्ति

तथापि, नए प्रस्‍तावित शाखा कार्यालय में किए जाने वाले व्‍यापार कम्‍पनी संघ के ज्ञापन में शामिल किया गया है। संघ का ज्ञापन कम्‍पनी को चार्टर है जो इसके गठन, इसका कार्यचालन की संभावना तथा इसके जोखिम धारकों को उद्यम के अनुमत दायरे के बारे में सूचित करने के उद्देश्‍यों को पारिभाषित करता है। कम्‍पनी के लिए इसके ज्ञापन के परे कार्य करना वाइटस है और किसी प्रकार का अतिक्रमण को वैधता नहीं दी जाती है यहां तक कि यदि कम्‍पनी के सभी सदस्‍य सहमत क्‍यों न हों। यह कम्‍पनी का मुख्‍य दस्‍तावेज है इसके बिना इसका पंजीकरण नहीं हो सकता है। यह कम्‍पनी के व्‍यापार के लिए नई शाखाएं खोलने के द्वारा विस्‍तार संबंधी प्रक्रियाओं को विनियमित करता है।

परन्‍तु यदि कम्‍पनी नई प्रस्‍तावित शाखा कार्यालय में नया व्‍यापार शुरू करना चा‍हती है जो इसके मौजूदा व्‍यापार का प्रासंगिक नहीं है तब इसे विशेष संकल्‍प पारित करना है। इसके बाद इसको एक घोषणा पत्र ई-प्रपत्र सं. 20क में संबद्ध कम्‍पनी पंजीयक (आरओसी) के पास संकल्‍प पारित करने के तीस दिनों के भीतर करना है और विशेष संकल्‍प ई-प्रपत्र सं. 23,में, यह अपेक्षित शुल्‍क का भुगतान करने के बाद किया जाता है जैसाकि अधिनियम के तहत निर्धारित है।

विदेशी कम्‍पनी द्वारा शाखा कार्यालय खोलने की प्रक्रिया

शाखा कार्यालय खोलना विकल्‍पों में से एक है जिसके द्वारा विदेशी कम्‍पनी भारत में अपना व्‍यापार कार्य की स्‍थापना कर सकती है। भारत में इस प्रकार के कार्यालय की स्‍थापना करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से पूर्वानुमति प्राप्‍त करने की आवश्‍यकता है। आरबीआई द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार ये शाखा कार्यालय निम्‍नलिखित शर्तों के अधीन हैं :-

  • आरबीआई द्वारा स्‍पष्‍ट रूप से अनुमोदित के अलावा शाखा कार्यालय अपने कार्यकलाप का विस्‍तार नहीं कर सकता या कोई नया व्‍यापार नहीं कर सकता, वाणिज्यिक या औद्योगिक कार्यकलाप नहीं कर सकता है।
  • भारत में शाखा कार्यालय का समस्‍त खर्च को या तो सामान्‍य बैंकिंग चैनल के जरिए विदेशों से प्राप्‍त की गई निधियों या भारत में इसके द्वारा अर्जित आय से पूरा किया जाएगा।
  • शाखा कार्यालय भारत में कोई जमा स्‍वीकार नहीं कर सकता है।
  • विदेशी पक्षों से शाखा कार्यालय द्वारा अर्जित कमीशन किसी भी एजेंसी के व्‍यापार के लिए, को सामान्‍य बैंकिंग चैनलों के जरिए भारत में वापस किया जाएगा।

विदेशों में विनिर्माण और व्‍यापार कार्यकलापों में रत विदेशी कम्‍पनियां भी निम्‍नलिखित प्रयोजनों से भारत में शाखा कार्यालय की स्‍थापना करने के लिए अनुमत हैं :

  • माल का आयात या निर्यात करना
  • व्‍यावसायिक या परामर्शी सेवा प्रदान करना
  • अनुसंधान कार्य करना जिसमें मुख्‍य कम्‍पनी रत है (बशर्तें कि अनुसंधान कार्य के परिणाम भारतीय कम्‍पनियों की उपलब्‍ध कराए जाते हैं)
  • भारतीय कम्‍पनियों और मुख्‍य या विदेशी समूह के कम्‍पनी के बीच वित्तीय और तकनीकीय सहयोग का संवर्धन करना।
  • भारत में मुख्‍य कम्‍पनी का प्रतिनिधित्‍व करना और भारत में खरीद/बिक्री के एजेंट के रूप में कार्य करना
  • भारत में सूचना प्रौद्योगिकी और साफ्टवेयर के विकास की सेवा प्रदान करना
  • मुख्‍य/विदेशी कम्‍पनी समूह द्वारा आपूर्ति किए गए उत्‍पादों को तकनीकी सहायता प्रदान करना
  • विदेशी एयरलाइन्‍स या नौवहन कम्‍पनियों के लिए भी भारत में अपने शाखा कार्यालय खोलना अनुमत है।

परन्‍तु, शाखा कार्यालय केवल व्‍यापार क्रियाकलाप कर सकते हैं और अपने आप विनिर्माण कार्यकलाप करने के लिए अनुमत नहीं हैं यद्यपि भारतीय विनिर्माताओं के लिए उपसंविदा की अनुमति दी जाती है। ऐसे कार्यालय विदेशी कम्‍पनी के अंग हैं और अलग कानूनी कम्‍पनी नहीं माने जाते हैं।

शाखा कार्यालय खोलने के लिए विदेशी कम्‍पनी को महा प्रबंधक के पास औपचारिक आवेदन प्रस्‍तुत करना आवश्‍यक है, विनिमय नियंत्रण विभाग (विदेशी निवेश प्रभाग) आरबीआई का केन्‍द्रीय कार्यालय, मुम्‍बई में प्रपत्र एफएनसी-1 में जमा करना है। इन आवेदनों पर मामले से मामले आधार पर विचार किया जाता है। आरबीआई साधारणत: 2 से 4 वर्ष के समय अवधि में अनुमति देता है। आवेदन में निम्‍नलिखित ब्‍यौरा शामिल हो :-

  • विश्‍वभर में कम्‍पनी का कार्य इतिहास
  • भारत में प्रस्‍तावित हित एवं क्रियाकलाप
  • शाखा कार्यालय खोलने की इच्‍छा के कारण और
  • ऐसे मामलों के लिए कोई विदेशी मुद्रा का निहित होना।

शाखा कार्यालय शाखा के लाभों को भारत के बाहर भेज सकते हैं जो भारतीय लागू करें को घटाकर आरबीआई के दिशानिर्देंशों के अधीन होगा। उन्‍हें भारत में आरक्षित के रूप में किसी लाभ को अपने पास रखने की आवश्‍यकता नहीं है। परन्‍तु कुछ मामलों में जहां आप भारत में व्‍युत्‍पन्‍न मानी जाती है और ऐसी आय में रॉयल्‍टी, तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्‍क, भारत में शेयर से पूंजी प्राप्ति सहित ब्‍याज और पूंजी प्राप्तियां शामिल है, शाखा कार्यालय अपने मुख्‍य कार्यालय को आरबीआई की पूर्वानुमति प्राप्‍त किए बिना लाभों को वापस कर सकते हैं।

^ ऊपर

 
संबंधित सम्‍पर्क :
कम्‍पनी कार्य मंत्रालय
कम्‍पनी (संशोधन) अधिनियम, 2000
कम्‍पनी अधिनियम, 1956
कम्‍पनी (संशोधन) अधिनियम, 2002
कम्‍पनी (संशोधन) अधिनियम, 2006
भारतीय रिजर्व बैंक
पंजीकरण प्रपत्र
विदेशी भारतीय मामले मंत्रालय
 
 
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