एक उद्यमी को स्थायी आधार पर सफलतापूर्वक अपने व्यापार का विस्तार और विकास करने के लिए देश की मूल विनियामक अपेक्षाओं को ध्यान में रखना है। ये अपेक्षाएं उसके उद्यम के देश की मूल विनियामक अपेक्षाओं को ध्यान में रखना है। ये अपेक्षाएं इसके उद्यम के देश की संविधिक ढांचा में कार्य करने के विचार के लिए और उसे अपने अधिकारों और दायित्वों को जानने के लिए तथा उसके सामने आने वाली चुनौतियों को जानने के लिए अनिवार्य हैं। महत्वपूर्ण विनियम माल और सेवाओं के निर्यात और आयात से संबंधित है जिसे वह भारत के भीतर और विदेश में अपना कारोबार को विस्तार करने के लिए करता/करती है। इसके लिए उसको विदेशी व्यापार (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1992 और समय-समय पर सरकार द्वारा घोषित निर्यात आयात नीति का पालन करना होगा। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय एक महत्वपूर्ण अंग है जो भारत में विदेशी व्यापार के संवर्धन और विनियमन से संबंधित है। व्यापार की विभिन्न पहलुओं की देखरेख के लिए मंत्रालय की स्पष्ट संगठनात्मक व्यवस्था है। मंत्रालय के भीतर वाणिज्य विभाग विदेश व्यापार नीति तैयार करने और क्रियान्वयन करने के लिए जिम्मेदार है।
व्यापार के स्थायी आधार पर विकास करने के लिए भी बाजार अर्थव्यवस्था में स्वस्थ और निष्पक्ष प्रतिस्पर्द्धा का होना आवश्यक है। तदनुसार, भारत सरकार ने विभिन्न कदम उठाया है जैसाकि प्रतिस्पर्द्धा नीति की घोषणा करना, प्रतिस्पर्द्धा अधिनियम, 2002 का अधिनियम, और भारतीय प्रतिस्पर्द्धा आयोग की स्थापना करना। इसका उद्देश्य प्रतिस्पर्द्धा विरोधी व्यापार प्रचालन का निषेध करना, उद्यम द्वारा एकाधिकार का दुरुपयोग तथा विभिन्न कारोबारी समिश्रणों जैसे विलयन ओर अविप्राप्ति का विनियमन करना। एटीए कारनेट सिस्टम का प्रचालन किया गया है। जिसका जो अग्रणी कम्पनियों के बीच माल का मुक्त आवागमन और उनका सीमाशुल्क क्षेत्र में अस्थायी दाखिला जिसमें शुल्कों और करों में राहत प्राप्त है। प्रणाली के अधीन माल एकल दस्तावेज़ जिसे एटीए कारनेट के नाम से जाना जाता है में शामिल किया जाता है जो अंतरराष्ट्रीय गारंटी सिस्टम द्वारा सुरक्षित है। यह सदस्य देशों में शुल्क रहित मालों का प्रवेश अनुमत करता है जिसके लिए एक या बहुत से विदेशी देशों में सीमाशुल्क बांड बिना लिए और अन्य सीमाशुल्क औपचारिकताओं को पूरा किए बिना ही यह किया जा सकता है। इसलिए फर्म को ऐसी सभी विनियामक अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए सभी कारोबारी निर्णय करना है।
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