उत्तरी गोलार्द्ध में स्थित भारत विश्व का सातवां सबसे विशाल देश है जिसका क्षेत्रफल 32,87,263 वर्ग किलोमीटर है। यह 8 डिग्री 4' उत्तर से 37 डिग्री 6' उत्तर अक्षांश, तथा 68' 7' पूर्व से 97 डिग्री 25' पूर्व देशांतर के बीच स्थित है। इसका विस्तार अक्षांशों के बीच उत्तर से दक्षिण तक लगभग 3,214 कि.मी. तथा देशांतरों के बीच पूर्व से पश्चिम तक लगभग 2,933 कि.मी. है। यह उत्तर में हिमाचल पर्वत; पूर्व में बंगाल की खाड़ी; पश्चिम में अरब सागर तथा दक्षिण में हिंद महासागर से घिरा हुआ है। मुख्य भूमि में चार क्षेत्र शामिल हैं, नामत: पर्वतीय क्षेत्र, गंगा तथा सिंधु मैदान, मरूस्थल क्षेत्र तथा अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह की तटीय रेखा की कुल लंबाई 7,516.6 कि.मी. है। इसके अतिरिक्त पश्चिमोत्तर में अफगानिस्तान तथा पाकिस्तान जैसे देशों; उत्तर में चीन, नेपाल तथा भूटान; पूर्व में म्यांमार तथा पश्चिम बंगाल के पूर्व में बांग्लादेश के साथ इसकी साझी सीमा है। श्रीलंका भी पालक स्ट्रेट तथा मन्नर की खाड़ी द्वारा निर्मित एक संकीर्ण समुद्री नहर द्वारा भारत से पृथक्कृत है।
विविध स्थालकृति से युक्त भारत अद्वितीय तथा विशाल भौगोलिक क्षेत्र ने इसे विश्व का एक सर्वाधिक आकर्षक गंतव्य स्थल बना दिया है। यह सुस्थिर नीतिगत परिवेश, कानून एवं व्यवस्था के साथ साथ अनुक्रियाशील प्रशासनिक संघटन वाला विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। यह विभिन्न विनिर्माणकारी तथा सेवा उद्योग के लिए एक वैश्विक संसाधन बन गया है। यहां कोयला, लोह अयस्क, मैंग्नीज अयस्क, अभ्रक, बॉक्साइट, पेट्रोलियम, टाइटेनियम अयस्क, क्रोमाइट, प्राकृतिक गैस, चूने का पत्थर, डोलोमाइट, काओलिन, जिप्सम, एपेटाइट, फॉस्फोराइट, स्टीटाइट, फ्लोराइट इत्यादि जैसे प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता है। इसका विशाल क्षेत्र लहलहाते हरे भरे वनों से भरा हुआ है जहां इमारती लकड़ी जैसे उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों की व्यापक किस्मों का उत्पादन होता है। यह विभिन्न जलवायु दशाओं से युक्त समृद्ध तथा विविध वनस्पति का भंडार है। यहां फल-फूल वनस्पति और पशुओं की बहुलता है।
भारत की विविध अर्थव्यवस्था में पारम्परिक ग्राम कृषि, आधुनिक कृषि, हस्तशिल्प, आधुनिक उद्योगों की व्यापक श्रृंखला तथा अनेकानेक सेवाएं शामिल है। कृषि योग्य भूमि के सर्वाधिक विशाल क्षेत्र वाला भारत विश्व का एक सबसे बडा भोजन उत्पादक है। यह दूध, गन्ने तथा चाय का सबसे बड़ा उत्पादक है तथा साथ ही चावल, फल और सब्जियों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। वर्धनात्मक निपटान योग्य आय तथा निरंतर बढ़ते बाजार के साथ भारत के तकनीकी जनशक्ति के आधार के पूल ने मिलकर भारत को वैश्विक उद्योग के एक व्यवहार्य भागीदार के रूप में उभरने में समर्थ बना दिया है। यह उन संगठनों के लिए एक वांछनीय महत्वपूर्ण स्थान है जो अपनी अनुसंधान एवं विकास गतिविधियां, सॉफ्टवेयर विकास कार्य, ग्राहक संपर्क केंद्रों अथवा सूचना प्रौद्योगिकी समर्थित व्यवसाय प्रक्रियाओं को आउटसोर्स करने के इच्छुक हैं। देश में उच्चतम विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) अंतर्वाह आकृष्ट करने वाले शीर्ष क्षेत्र हैं :- वैद्युत उपकरण, सेवा क्षेत्र (वित्तीय तथा गैर वित्तीय, दूर संचार, परिवहन उद्योग, ईंधन, रसायन, निर्माण गतिविधियां, औषध एवं भेषज, खाद्य प्रसंस्करण, सीमेंट तथा जिप्सम उत्पाद। उदीयमान ज्ञान प्रक्रिया आउटसोर्स (केपीओ) क्षेत्र तथा स्थावर संपदा उद्योग में भारी निवेश संभाव्यता विद्यमान है।
भारत सरकार देश के समस्त ऐसे फायदों को अनुपूरित करने के सभी प्रयास कर रही है। इसने मूल संरचना विकास को संकेंद्रण का एक मुख्य क्षेत्र बना दिया है। रेल, सड़क, पत्तनों तथा हवाई मार्ग से भारतीय राज्यों के बीच तथा शेष विश्व के साथ सुदृढ़ तथा प्रभावी संयोजकता एक आवश्यकता है इसके साथ ही, किफायती एवं दक्ष विद्युतापूर्ति तथा उत्कृष्ट दूर संचार नेटवर्क देश के विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। तदनुसार, सरकार ने देश में निवेशकों को आकृष्ट करने के लिए तथा लोगों के लिए अच्छे रहन-सहन वाले जीवन की व्यवस्था करने के लिए अनेक नीतिगत उपाय तथा प्रोत्साहन शुरू किए हैं।
इस प्रकार भारत विश्व के कुछेक बाज़ारों में से एक है जो व्यापार, विशेषतया पर्यटन, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) तथा कृषि क्षेत्र के व्यवहार्यत: सभी क्षेत्रों में संवृद्धि तथा अर्जन संभाव्यता के लिए उच्च संभावनाओं की पेशकश करता है। राष्ट्रीय स्तर तथा राज्य स्तर, दोनों में अपार निवेश अवसर मौजूद हैं।