अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के सरकार द्वीपों की पारिस्थितिकी को बाधित किए बिना उद्योगों के संतुलित विकास पर विशेष ज़ोर देती हैं। द्वीपों के औद्योगिक आधार में मुख्यत: लघु और बहुत छोटे उद्योग शामिल हैं जिनमें राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में विशाल योगदान करने की बहुत संभाव्यता हैं। यहां के उद्योग मुख्यत: काष्ठ और कृषि आधारित हैं। छोटे यूनिट मुख्य इन चीज़ों का उत्पादन करते है: पेन्ट तथा वर्निश, छोटी आटा चक्कियाँ, मृदु पेय तथा बेवरेज, स्टील का फर्नीचर तथा फिक्सचर, तैयार कपड़े, स्टील के गेट ग्रिल तथा संरचनाएँ। ये उद्योग निवेश को आकर्षित करने और व्यापार की सुविधाओं के लिए अनेक अवसर प्रदान करते हैं।.
कृषि आधारित उद्योग
अंडमान द्वीप समूह की मुख्य खाद्य फसल धान है और निकोबार द्वीप समूह की मुख्य नकदी फ़सलें नारियल तथा सुपारी हैं। इसके अतिरिक्त लौंग, मिर्च, दालचीनी आदि मसाले भी उगाए जाते हैं। अल्प मात्रा में ईख, लाल तेल ताड़, फलों तथा सब्जियों की भी खेती होती हैं। कृषि आधारित तथा खाद्य संसाधन उद्योगों के विकास के लिए इन सबका लाभकर उपयोग किया जा सकता हैं। इसके अतिरिक्त, केला, आम, अनान्नास तथा पपीता आदि पर आधारित सब्जियों और फलों के संसाधन के लघु उद्योग स्थापित किए जा सकते हैं।
मात्स्यिकी (समुद्री)
अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह की 1912 किमी की लंबी तटरेखा है और मात्स्यिकी के विकास के लिए बहुत संभावना हैं। इसका 6 लाख वर्ग किमी का अनन्य आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) है जो भारत के कुल अनन्य आर्थित क्षेत्र का 30 हैं। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के समुद्र में मछलियों की 1100 से अधिक जातियों की पहचान की गई है जिनमें से अभी लगभग 30 जातियों का वाणिज्यिक उपयोग किया जा रहा है। द्वीप समूह की अनुमानित समुद्री संभाव्यता 2.44 लाख टन है जो अधिकतर अप्रयुक्त हैं। अंडमान और निकाबार सरकार मत्स्य कृषि, मत्स्य संसाधन तथा अन्य संबंधित उद्योगों के विकास पर विशेष ज़ोर देती है यथा मछली का अचार, मछली की डिब्बाबंदी, मछली का आटा, मछली का तेल आदि।
पर्यटन
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को पारिस्थितिकी के अनुकूल पर्यटक क्षेत्र के रूप में मान्यता दी गई हैं। उष्ण कटिबंधीय सदाबहार वर्षा वन, रजताभ बालू-तट, मैन्ग्रोव की घुमावदार पंक्तियां, संकरी खाडियां, पादपों, प्राणियों, प्रवालों आदि की दुर्लभ जातियों से भरपूर समुद्री जीवन पर्यटकों के लिए स्वर्ग हैं। पर्यटकों को आकर्षित करने हेतु पयर्टक मूल संरचना के विकास के लिए सरकार ने अनेक परियोजनाएं तथा उपाय शुरू किए हैं। इस क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के लिए वह पर्यटन तथा संबंधित गतिविधियों को उद्योग मानती हैं। इस उद्देश्य से उसने एक पर्यटन नीति, की घोषणा की है जिसका लक्ष्य प्राकृतिक परिस्थितिकी तंत्र को बाधित किए बिना मूल संरचना के पर्यावरण की दृष्टि से चिरस्थायी विकास द्वारा पारिस्थितिकी-पर्यटकों के लिए अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का विकास एक उत्तम क्षेत्र के रूप में करने का हैं।
परियोजना प्रोफ़ाइल:-
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