भारत अवसरों से परिपूर्ण भूमि है जिसमें विविध क्षेत्रों से द्विपक्षीय तथा बहुपक्षीय संस्थाओं सति व्यष्टियों, कॉपोरेटों, सरकारी निकायों को निवेशकों के रूप में देश में आकृष्ट करने की सक्षमता है। ये निवेश अवसर विश्व मंच पर भारत की लाभप्रद स्थिति में सन्निहित हैं :-
- एक त्रिस्तरीय लोकतांत्रिक प्रणाली जो एक प्रस्थिर नीति माहौल सुनिश्चित करती है।
- एक सुविकसित प्रशासनिक तथा स्वतंत्र न्यायिक प्रणाली
- विविध स्थालकृति से युक्त एक विशाल भौगोलिक क्षेत्र जो भारत को संसाधनों का भंडार बना देता है।.
- एक विविध सांस्कृतिक विरासत जिसके कारण भारतीय अन्य संस्कृतियों के लोगों के साथ सहज रहते हैं तथा इससे निवेशकों के लिए एक सहिष्णु माहौल की व्यवस्था होती है।
- कृषि वस्तुओं का एक सबसे बड़ा उत्पादक जिससे आत्मनिर्भरता सुनिश्चित होती है।
- अर्थव्यवस्था के लगभग सभी खंडों में व्याप्त विनिर्माणकारी क्षमता
- अभियंताओं, प्रबंधकीय कार्मिकों, लेखाकारों तथा वकीलों सहित शिक्षित, परिश्रमी, कुशल जनशक्ति का अतुल्य संसाधन
- तीव्रता से बढ़ता उपभोक्ता आधार जिसने इसे विनिर्मित वस्तुओं तथा सेवाओं के लिए विश्व का एक सबसे बड़ा बाज़ार बना दिया है।
- एक गतिशील तथा मजबूत वित्तीय प्रणाली जिसमें व्यापक बैंकिंग नेटवर्क, अनेक राष्ट्रीय तथा राज्य स्तरीय वित्तीय संस्थाएं तथा साथ ही एक उत्साहशील पूंजी बाजार शामिल है। यह मौद्रिक तथा राजकोषीय प्रोत्साहनों के सुनिर्धारित पैकेज के साथ साथ उदार एवं प्रगामी नीतियों द्वारा समर्थित है।
- राष्ट्र व्यापी विशाल तथा विविधीकृत मूल संरचना जो दूसरे राष्ट्रों के बाजारो को सहज सुगम्यता उपलब्ध कराती है।
- विविध क्षेत्रों में फैली एक सुविकसित अनुसंधान एवं विकास (आर एवं डी) संरचना
- अंतरराष्ट्रीय रूप से अनुसरित मानकों के समरूप लेखाकरण मानक
- एक नीतिगत ढांचा जिसमें प्रवेश तथा अवस्थिति, प्रौद्योगिकी चयन, उत्पादन, पूंजी प्रत्यावर्तन, लाभांश इत्यादि की स्वतंत्रता के लिए स्पष्ट दिशानिर्देशों की व्यवस्था है जो विशिष्ट रूप से निवेश प्रवाह के संवर्धन की ओर लक्षित हैं।
- ठोस आर्थिक मूलाधार
संभाव्यता को देखते हुए, केंद्र तथा राज्य सरकारें विश्व निवेश उछाल का महत्वपूर्ण अंश हासिल करने के उद्देश्य से अनेक नीतिगत उपाय तथा प्रोत्साहन क्रियान्वित करती रही हैं। महत्व के नए क्षेत्रों को शामिल करने के उद्देश्य से बदलते आर्थिक परिदृश्य के अनुसरण में इन नीतियों तथा प्रोत्साहनों को नियमित रूप से संशोधित तथा अद्यतन किया जाता है। इनमें निम्न शामिल हैं:-
- कॉपोरेट करों की दरों में प्रगामी अपचयन सहित कर रियायतें तथा करावकाश; रियायती; सीमाशुल्क; पर पूंजीगत वस्तुओं का आयात, इत्यादि;
- रियायती ब्याज दरों पर ऋण;
- विभिन्न रूपों में आर्थिक सहायता;
- विशेष आर्थिक क्षेत्रों की स्थापना;
- विदेशी संस्थागत निवेशकों के लिए भारतीय पूंजी बाजारों को खोलना;
- भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाज़ारों से निधियां जुटाने की अनुमति;
- कुछ शर्तों के अध्यधीन लाभों के प्रत्यावर्तक की अनुमति;
- निवेश प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए विभिनन राज्यों में एकल बिंदु समाशोधन सुविधाओं की व्यवस्था की गई हैं;
- निवेशक देशों के साथ कई दिपक्षीय निवेश संरक्षण करारों पर हस्ताक्षर।
इसके अलावा वित्त मंत्रालय में निवेश आयोग की स्थापना देश में निवेश प्रवाह को संवर्धित करने एवं सुसाध्य बनाने के लिए एक अन्य महत्वपूर्ण पहल है। आयोग सरकार को निवेश सुकर बनाने की नीतियों तथा प्रक्रियाओं संबंधी अनुशंसाएं करता है; परियोजनाओं तथा निवेश प्रस्तावों की अनुशंसा करता है; तथा एक निवेश गंतव्य के रूप में भारत का संवर्धन करता है। यह निम्नलिखित कार्यकलाप करता है :-
- निवेश अवसरों का क्षेत्रक आकलन;
- भारत का संवर्धन करने के लिए एक 'निवेश हस्तपुस्तिका' तथा बेवसाइट;
- वर्तमान तथा भावी निवेशकों की पहचान तथा उनके साथ व्यक्तिगत बैठकें;
- विदेशी दूतावासों, विदेशी निवेशक समूहों, भारतीय कारोबार परिषदों तथा व्यपार संघों के साथ बैठकें;
- उन नीति/विनियमों की पहचान करना जो निवेश के लिए बाधक हैं; इत्यदि।
ऐसे सभी प्रयासों के परिणामस्वरूप, विदेशी निवेश का लगभग सभी क्षेत्रों में स्वागत किया जाता है सिवाए उन क्षेत्रों के जो सामरिक महत्व के है (उदाहरणार्थ रक्षा तथा परमाणु ऊर्जा) तथा सामान्यत: स्वचालित मार्ग के तहत 100 प्रतिशत विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की अनुमति दी जाती है। ऐसे बदलते निवेश माहौल में, भारत अर्थव्यवस्था के वस्तुत: प्रत्येक क्षेत्र में आकर्षक व्यवसाय अवसरों की पेशकश कर रहा है।
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