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Legal Aspects बौद्धिक सम्‍पत्ति अधिकार से संबंधित कानून
Legal Aspects मुख्‍य विनियम
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मुख्‍य विनियम

एक उद्यमी को अपने कारोबार के लाभ को बनाए रखना और उत्‍पादकता कायम रखना सुनिश्चित करने के लिए देश की मूल विनियामक अपेक्षाओं के ध्‍यान में रखना होता हैं। अति महत्‍वपूर्ण विनियम परिवेश से संबंधित होता है। पर्यावरणीय विनियामक अपेक्षाओं में व्‍यापक विधान संबंधी संरचना की परिकल्‍पना की जाती है जिसमें पर्यावरणीय सुरक्षा के प्रत्‍येक पहलू को शामिल किया जाता है। मोटे तौर पर इसमें वायु, ध्‍वनि, पानी आदि के उत्‍सर्जन मानकों को शामिल किया जाता है। आपदा जनक अपशिष्ट के उत्‍सर्जन के लिए अलग कानून के सैट भी अधिनियमित किए गए हैं। पर्यावरणीय संरक्षण के लिए प्रत्‍येक उद्योग को इन दिशानिर्देशों और मानदंडों का अनुपालन करना होता है।

इसके सुचारू और प्रभावी संचालन के लिए एक संगठन को इसके कर्मचारियों का स्‍वस्‍थ और सुरक्षा सुनिश्चित करना है। भारत में व्‍यावसायिक स्‍वास्‍थ्‍य और सुरक्षा से संबंधित मुख्‍य विधान निम्‍नलिखित हैं :- फैक्‍टरी अधिनियम, 1948, खान अधिनियम, 1952, गोदी कर्मकार (सुरक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य और कल्‍याण) अधिनियम 1986, खान सुरक्षा महानिदेशालय (डी जी एम एस) और फैक्‍टरी परामर्श सेवा श्रम संस्‍थान महानिदेशालय (डी जी एफ ए एस एल आई) खानों, फैक्‍टरियों और पत्तनों में व्‍यावसायिक सुरक्षा के क्षेत्र में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के दो क्षेत्रीय संगठन हैं।

इसके अतिरिक्‍त भारत सरकार ने प्रतिस्‍पर्द्धा नीति की घोषणा करना, प्रतिस्‍पर्द्धा अधिनियम, 2002 अधिनियम करना, भारतीय प्रतिस्‍पर्द्धा आयोग का गठन करने जैसे कदम उठाया हैं ताकि बाजार अर्थव्‍यवस्‍था में स्‍वास्‍थ्‍य और निष्‍पक्ष प्रतिस्‍पर्द्धा को सुनिश्चित किया जा सके। इसका लक्ष्‍य प्रतिस्‍पर्द्धा विरोधी व्‍यावसायिक प्रथाओं को रोकना, उद्यम द्वारा एकाधिकार के दुरुपयोग को रोकना तथा विलयन और अधिग्रहण जैसे विभिन्‍न व्‍यावसायिक संयोजन को विनियमित करना।

माल और सेवाओं के निर्यात एवं आयात के विनियमन के लिए उद्यमी को विदेश व्‍यापार (विकास और विनियमन) अधिनियम 1992 और समय-समय पर सरकार द्वारा घोषित निर्यात-आयात नीति का पालन करना है। वाणिज्‍य और उद्योग मंत्रालय एक अति महत्‍वपूर्ण अंग है जो भारत में विदेश व्‍यापार के विनियमन से संबंधित है। व्‍यापार की विभिन्‍न पहलुओं की देख-रेख करने के लिए मंत्रालय के पास सुस्‍पष्‍ट संगठनात्‍मक ढांचा है। मंत्रालय के अंदर, वाणिज्‍य विभाग विदेश व्‍यापार नीति तैयार करने एवं उसे क्रियान्वित करने के‍ लिए जिम्‍मेदार है।

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