ग्राहक संबंध प्रबंधन (क्लाइंट रिलेशनशिप मैनेजमेंट-सीआरएम) का अर्थ है आपके ग्राहक की प्रबंधन व्यवस्था। यह कारोबारी कार्यनीति है, जिसका प्रयोग दीर्घकालिक, लाभकारी ग्राहक संबंध पैदा करने और बनाए रखने के लिए किया जाता है। इसका अभिप्राय है मात्रात्मक एवं गुणात्मक अनुसंधान का प्रयोग करके ग्राहकों को समझना, उन्हें श्रेणीबद्ध करना तथा उनकी प्रत्याशाओं एवं लाभ में उनके अंशदान के आधार पर प्रत्येक खण्ड के लिए स्थितिजन्य विवरण प्रस्तुत करना। पुराने ग्राहकों को बनाए रखने, नए ग्राहक प्राप्त करने और मौजूदा ग्राहक आधार से लाभप्रदता में सुधार लाने के लिए ऐसा करना ज़रूरी है। सीआरएम की संकल्पना का उद्भव व्यापार के प्रबंधन तथा लाभप्रदता के प्रति बदले दृष्टिकोण में निहित है। दूसरे शब्दों, एक-कालिक बिक्री करने परम्परागत दृष्टिकोण का स्थान अब ग्राहकों के प्रति दीर्घकालिक प्रतिबद्धता ले रही है। इस नए दृष्टिकोण में संगठन में उपयुक्त ग्राहक संबंध प्रबंधन (सीआरएम) कार्यनीति अपनाए जाने की ज़रूरत की बात कही गई है। यह ग्राहकों के आस-पास घूमती है। यह ग्राहकों को उनका मूल्य सृजित करने, संप्रेषित करने और सुपुर्द करने तथा इस तरह ग्राहक संबंधों का प्रबंधन करने की प्रक्रियाओं का सेट है जिससे संगठन और इसके हित धारकों को लाभ होता है। यह ग्राहकों के साथ दीर्घकालिक संबंधों को बढ़ाने के लिए सावधानीपूर्वक लक्षित ग्राहकों को प्राप्त करने, रखने और उनके साथ भागीदारी करने की व्यापक कार्यनीति है। इस प्रबंधन दृष्टिकोण में कम्पनी और ग्राहकों के लिए उत्कृष्ट मूल्य सृजित करने का प्रयास किया जाता है।
ग्राहक संबंध और संतुष्टि प्रत्येक कारोबारी उपक्रम का एक महत्वपूर्ण आयाम है। सफल व्यापार की बुनियाद उसके सफल ग्राहक संबंध प्रबंधन में निहित होती है। कम्पनी के निष्पादन पर ग्राहक की संतुष्टि इस बात पर निर्भर करती है कि कम्पनी उनकी व्यावसायिक एवं व्यक्तिगत ज़रूरतों को किस प्रकार पूरा करती है। ग्राहक न सिर्फ इस पर ध्यान देता है कि कम्पनी क्या करती है बल्कि इस बात पर भी ध्यान देता है कि कम्पनी वह कार्य किस प्रकार करती है। इसलिए सेवा की गुणवत्ता से संबंधित ग्राहक की धारण का उचित ध्यान रखा जाना चाहिए। किसी भी संगठन के लिए एक कार्यकुशल और कारगर सीआएम कार्यनीति कई तरह से लाभकर होती है :-
- अधिक महत्वपूर्ण यह है कि यह कम्पनी के एक वफादार ग्राहक आधार निर्मित करने और उसे बनाए रखने में मदद देती है।
- यह ऐसे ग्राहकों के समूह को अधिक मात्रा में बिक्री कर सकती है जिसके साथ इसके अच्छे संबंध हो और जो फर्म और इसकी सेवाओं की गुणवत्ता से संतुष्ट हों।
- समय बीतने पर यह उन ग्राहकों को सेवा प्रदान करने में कम लागत उपार्जित करती है क्योंकि ग्राहकों का बढ़ता विश्वास और उत्पाद के बारे में कम संदेह या प्रश्न की स्थिति पैदा हो जाती है।
- उन ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए इसे संवर्धात्मक अभियानों का कम सहारा लेना होगा।
- यदि इसका संतुष्ट ग्राहकों का स्थिर आधार है तो यह अपने कर्मचारियों को रखे रहने का लाभ भी उठाती है।
इसके अलावा, ग्राहक भी फर्म के प्रति वफ़ादार रहना चाहते हैं क्योंकि वे भी ऐसे दीर्घकालिक संबंध का लाभ उठाते हैं। इससे उनमें फर्म की सेवाओं में भरोसा और विश्वास का भावना जगती है तथा साथ ही उत्पाद के बारे में चिन्ता कम रहती है। समय बीतने पर, दीर्घकालिक ग्राहक – फर्म संबंध में, सेवा प्रदाता वस्तुत: ग्राहक को सामाजिक – सहायक तंत्र का हिस्सा बन सकता है। ऐसे ग्राहक संगठन से विशेष व्यवहार भी प्राप्त कर सकते हैं जो इस प्रकार हो सकता है :- संदेह का लाभ मिलना; विशेष डील या कीमत दिया जाना; तरजीही व्यवहार मिलना इत्यादि।
एक सफल सीआरएम उपक्रम ऐसे कारोबारी सिद्धान्त से शुरू होता है जो कम्पनी के कार्यकलाप को ग्राहकों की ज़रूरतों के चारों और जोड़ता है। व्यावसायिकता, श्रवण कौशल, उपलब्धता, अनुक्रियाशीलता, विश्वसनीयता इत्यादि का स्तर ग्राहक संबंध प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सीआरएम में कम्पनी द्वारा अपने ग्राहकों के साथ अपने संबंधों की प्रबंध व्यवस्था हेतु इस्तेमाल किए गए सभी तरीके और विधियां शामिल होती है। सीआरएम की प्रक्रिया में निम्नलिखित शामिल होते हैं :-
- ग्राहक –उन्मुखी सिद्धांतों को बढ़ावा देना।
- ग्राहक आधारित उपाय अपनाना।
- ग्राहकों को सेवा प्रदान करने के लिए सम्पूर्ण प्रक्रिया विकसित करना।
- सफल ग्राहक सहायता प्रदान करना।
- सफल ग्राहक सहायता प्रदान करना।
- ग्राहकों की शिकायतों पर कार्रवाई करना।
सीआरएम का उद्भव वस्तुत: 'सेल्स फोर्स ऑटोमेशन' (एसएफए) में हुआ जो किसी भी कम्पनी की बिक्री दर को बिक्री की प्रक्रिया की कार्यदक्षता में सुधार लाने के लिए प्रौद्योगिकीय सहायता देने की प्रक्रिया है। एसएफए के मुख्य लाभ इस प्रकार है :- बिक्री दल को शीघ्र और सही अनुक्रिया करने में मदद देकर ग्राहक सेवा में सुधार; बिक्री दल की उत्पादकता में सुधार; और बिक्री प्रक्रिया बेहतर प्रबंधन नियंत्रण एवं स्पष्टता।
आम तौर पर, सीआरएम दो स्तरों पर कार्य करता है:-
- प्रचालनात्मक सीआरएम:- जिसे ''फ्रंट ऑफिस'' सीआरएम भी कहा लाता है, बिक्री, विपणन, सेवाओं इत्यादि जैसी बुनियादी कारोबारी प्रक्रियाओं को सहायता प्रदान करता है। यह उन क्षेत्रों से जुड़ा होता है जहां ग्राहका कम्पनी के सीधे सम्पर्क में आता है। ये सम्पर्क दो श्रेणियों में वर्गीकृत हैं:- (i) अन्तर्वाही सम्पर्क वे होते हैं जहां ग्राहक कम्पनी सहायता केन्द्र या वेबसाइट से सम्पर्क करता है या कम्पनी के कर्मचारियों से मिलता है। (ii) बहिर्वाही सम्पर्क वे होते हैं जहां फर्म का सेल्स प्रतिनिधि ग्राहकों को सीधे बिक्री करता है या सेल्स कॉल करता है या विपणन संदेश हेतु ई-मेल करता है। इन प्रत्यक्ष मुलाकातों को ग्राहक का '' टच प्वाइंट'' कहा जाता है। ग्राहक के साथ प्रत्येक मुलाकात को आमतौर पर ग्राहक के इतिहास में जोड़ दिया जाता है और कम्पनी आवश्यकता होने पर डाटाबेस से ऐसी सूचना प्राप्त कर सकती है।
- विश्लेषण सीआएम :- इसे ''बैक ऑफिस'' या ''महत्वपूर्ण'' सीआरएम भी कहा जाता है जिसमें फ्रंट ऑफिस में घटित ग्राहक संबंधी कार्यों को समझना शामिल होता है। इसमें मौजूदा ग्राहकों को बनाए रखने और उन्हें समय पर तथा नियमित सूचना मुहैया कराना शामिल है। इसमें विश्लेषण को सुसाध्य बनाने और कारोबारी निर्णयों के परिष्कृत करने के लिए नई कारोबारी प्रक्रियाएं विकसित करने में ग्राहकों के आंकड़े संकलित करने के लिए प्रौद्योगिकी को इस्तेमाल किया जाता है।
उत्पाद – केन्द्रीयता ऐसी चुनौती है जिसका सामना किसी भी संगठन को एक सफल ग्राहक संबंध प्रबंधन के लिए करना ही होना। दूसरे शब्दों में, किसी भी संगठन के ग्राहक – केन्द्रित बनना होगा क्योंकि इसके उसका सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र ''ग्राहक'' के लिए निरंतर अन्त: क्रिया चलती रहती है। |