| विपणन सभी व्यापारिक कार्यकलापों का संकेन्द्रण बिंदु है क्योंकि उत्पादन या क्रय का कोई अर्थ नहीं है जब तक कि फर्म अपनी वस्तुओं तथा सेवाओं का विपणन करने में समर्थ न हो। इसे उपभोक्ता की रुचि का पता लगाने तथा फिर उसे उत्पादों एवं सेवाओं में रूपांतरित करने की प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया गया है। इसमें वह सब शामिल है जो कोई कम्पनी इस प्रयोजनार्थ करती है कि ग्राहक उसके उत्पाद को खरीदें। यह मानव इच्छाओं के अभिचिन्हाकंन, आकलन तथा संतुष्टि की एकीकृत प्रक्रिया अर्थात संकेन्द्रण ग्राहक तथा उसकी इच्छाओं पर होता है।
विपणन की संकल्पना तीन मूलभूत घटकों पर आधारित है :- (i) बिक्री प्रमात्रा को अधिकतम करने के बजाए ग्राहकों की संतुष्टि के जरिए लाभ फर्म का उद्देश्य होना चाहिए; (ii) कम्पनी की समस्त आयोजना, नीतियां तथा प्रचालन ग्राहकों की ओर उन्मुख होने चाहिए; (iii) फर्म की समस्त विपणन गतिविधियां संगठनात्मक लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए एकीकृत होनी चाहिए। एक सफल व्यवसाय के लिए, विपणन अभियान का संकेन्द्रण ग्राहकों के लक्ष्य समूह पर होना चाहिए तथा उसमें उनके लिए उपयुक्त विपणन मिश्र (संयोजन) का निर्धारण किया जाना चाहिए।
'विपणन मिश्र (संयोजन)' कम्पनी की विपणन प्रणाली के सार तत्व का संघटन करने वाली चार निविष्टियों के संयोजन को वर्णित करने के लिए प्रयुक्त पर है। ये निविष्टियां हैं :- उत्पाद; कीमत; संवर्धन; तथा वास्तविक वितरण। विपणन मिश्र के ये घटक परस्पर संबंधित हैं क्योकि एक क्षेत्र को प्रभावित करते हैं। विपणन मिश्र एक गतिशील संकल्पना है क्योंकि यह बाजार दशाओं तथा माहौल में परिवर्तनों के साथ बदलती रहती है
विपणन का कार्यक्षेत्र अत्यंत व्यापक है तथा इसे उद्यमी के तीन मुख्य कार्यों के संदर्भ में समझा जा सकता है जिनमें ये शामिल है :- (i) विनिमय के कार्य या बिक्री; (ii) वास्तविक आपूर्ति के कार्य अथवा भंडारण एवं भांडागारण; तथा (iii) सुविधाकरण के कार्य या बाजार अनुसंधान।
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