| किसी भी उद्यमी को अपने व्यापार की प्रबंध व्यवस्था करते समय अपने संगठन के लिए बुनियादी विनियामक अपेक्षाओं का ध्यान रखना होता है। ये विनियामक अपेक्षाएं यह सुनिश्चित करती हैं कि संगठन देश की सांविधिक संरचना के अनुसार कार्य करे। सबसे महत्वपूर्ण विनियम है भारतीय संविदा अधिनियम, 1872, जो कम्पनी के समस्त लेन देनों को विनियमित करता है। यह संविदाओं के निर्माण और प्रवर्तनीयता से संबंधित सामानय सिद्धान्त: करार और पेशकश के उपबन्धों को शासित करने वाले नियम; मुआवज़े एवं गारंटी, ज़मानत और गिरवी तथा अभिरण वाली संविदाओं सहित विभिन्न प्रकार की संविदाओं, का निर्धारण करता है। इसमें संविदा को भंग करने से संबंधित उपबंध भी शामिल हैं। अगला महत्वपूर्ण विनियम फर्म द्वारा गुणवत्ता से संबंधित है। देश में गुणवत्ता के मानकों के प्रवर्तन के लिए सरकार ने भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) स्थापित किया है। बीआईएस ने गुणवत्ता नियंत्रण के लिए अन्तराष्ट्रीय मानकीकरण संगठन द्वारा निर्धारित आईएसओ 9000 के मानकों को अपना लिया है। आईएसओ 9000 श्रृंखला अब तक आईएसओ की सबसे अधिक सुप्रसिद्ध मानक में से एक रही है। यह ग्राहक के लिए उत्पादों एवं सेवाओं के उत्पादन तथा सुपुर्दगी की सभी प्रक्रियाओं में उच्च कोटि के प्रबंधन हेतु संरचना का प्रावधान करती है। बीआईएस अपने प्रबंधन प्रणाली प्रमाणन कार्यकलाप के तहत आईएस/आईएसओ 9001 : 2000 के संबंध में प्रमाणन भी प्रदान करता है। कोई भी संगठन बीआईएस की गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली प्रमाणन (आईएस/आईएसओ 9001:2000) योजना/क्यूएमएलसीएस के अंतर्गत लाइसेंस प्राप्त कर सकता है। इस योजना में अनेक उद्योग एवं सेवा क्षेत्र हैं जिनमें ये शामिल हैं- इंजीनियरिंग, रसायन, भेषजीय, सीमेंट, सिरैमिक, खाद्य-पदार्थ, वस्त्र, ऑटोमोटिव, मैकेनिकल, धात्विक, वैद्युत, इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोनॉटिक्स, अस्पताल, वित्तीय, बैंकिंग सेवाएं, निर्माण, थोक एवं खुदरा व्यापार, शिक्षा एवं प्रशिक्षण, होटल, विद्युत, मुद्रण, दूरसंचार, परीक्षण प्रयोगशालाएं और सूचना प्रौद्योगिकी। एक मज़बूत गुणवत्ता नियंत्रण तंत्र यह सुनिश्चित करता है कि फर्म ऐसे उत्पादों का उत्पादन करे जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हों और इस तरह फर्म के विकास को बढ़ावा मिले।
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