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मानव प्रबंधन संसाधन:
प्रशिक्षण
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मानव संसाधन प्रबंधन प्रक्रिया में नवनियुक्ति कर्मचारियों को प्रशिक्षण देना अगला महत्‍वपूर्ण कदम है। क्रमबद्ध और वैज्ञानिक प्रशिक्षण सशक्‍त जन शक्ति प्रबंधन की नींव है। प्रशिक्षण कर्मचारियों की जानकारी बढ़ाने, कौशल, रुझान और क्षमता वर्धन की प्रक्रिया है ताकि वे सक्षम तरीके से विशिष्‍ट कार्य कर सकें। इसमें तकनीकी जानकारी, छल साधक कौशल, समस्‍या का समाधान करने की क्षमता और कर्मचारी में सकारात्‍मक मनोवृत्ति सन्निहित है। मानव संसाधन प्रशिक्षण में प्रयुक्‍त संसाधन मानव परिसम्‍पत्ति में निवेश है और इस प्रक्रिया में हासिल किया गया कौशल उद्यम और कर्मचारी दोनों के लिए फायदेमंद होता है।

प्रशिक्षण का प्रयोजन अपने वर्तमान और संभावित कार्य के प्रति कर्मचारियों को जानकारी देना है। यह नए कर्मचारियों को उनके ज्ञान को पुन: ताजा करने द्वारा कम समय में अधिक उत्‍पादक और सक्षम एवं पुराने कर्मचारियों को नई मशीनों और तकनीकियों की जानकारी देता है। क्रमबद्ध और औपचारिक प्रशिक्षण की आवश्‍यकता बढ़ गई है चूंकि प्रौद्योगिकी में त्‍वरित परिवर्तन हो रहे हैं जो नए कार्य के अवसरों का सृजन करती है। इन किए गए कार्यों के लिए कुछ विशेष कौशल का विकास उपयुक्‍त और सर्वोत्तम प्रचालन विधि द्वारा करने की आवश्‍यकता होती है।

प्रशिक्षण के मुख्‍य लाभ निम्‍नलिखित हैं :-

  • अधिक निष्‍पादन :- प्रशिक्षण कार्य परिणाम की गुणवत्ता और प्रमात्रा में सुधार करने, ज्ञान वर्धन करने, कर्मचारियों और संगठन दोनों का समग्र रूप से कौशल एवं उत्‍पादकता बढ़ाने में सहायता करता है।

  • कम शिक्षण अवधि :- यह शिक्षण समय और स्‍वीकार्य स्‍तर के निष्‍पादन प्राप्‍त करने में अपेक्षित लागत कम करने में सहायता करता है। कर्मचारी प्रयत्‍न या चूक दूसरों को देखकर सीखने के द्वारा समय नष्‍ट नहीं करते हैं।

  • प्रक्रिया की एकरुपता :- इसके द्वारा कार्य करने की सर्वोत्तम उपलब्‍ध प्रविधि का मानकीकरण किया जा सकता है और सभी कर्मचारियों को सिखाया जा सकता है, जो निष्‍पादन की गुणवत्ता सुधारने में सहायता करता है।

  • जनशक्ति विकास :- यह संगठन को जनशक्ति की आवश्‍यकताएं पूरी करने में सहायता करता है और इस प्रकार से कठिनाइयों का सामना करने और चयन प्रक्रिया में शामिल त्रुटियों से निजात पाने में सहायता करता है। इसके अंतर्गत होनहार कर्मचारियों को पहचाना जा सकता है और उन्‍हें उच्‍च स्‍तरीय कार्यों के लिए प्रशिक्षित किया जा सकता है इस तरह से सक्षम नियोजन के लिए आरक्षण की व्‍यवस्‍था करता और प्रबंधकीय अपक्षय से बचाता है।

  • सामग्री और उपकरण की मिव्‍ययिता :- यह प्रशिक्षित कर्मचारियों को सामग्री और उपकरणों का बेहतर और किफायती उपयोग करने में सहायता करता है इस प्रकार से बर्बादी कम होगी और औद्योगिक दुर्घटना की दर और मशीनरी की क्षति की दर भी कम से कम होगी। इसके परिणामस्‍वरूप प्रति यूनिट उत्‍पादन लागत कम होगी।

  • कम पर्यवेक्षण :- कर्मचारियों को उनके कार्यों में स्‍वावलम्‍बी बनाकर यह उनके ब्‍यौरेवार और लगातार पर्यवेक्षण को कम करता है चूंकि वे जानते हैं कि क्‍या करना है और कैसे करना है।

  • उच्‍च मनोदशा :- यह कर्मचारियों को कार्यसंतुष्टि देता है, उनकी मनोदशा में सुधार लाता, उनमें सकारात्‍मक मनोदशा का विकास करने उन्‍हें संगठन के प्रति अधिक सहयोगी एवं निष्‍ठा वफादार बनाने में सहायता करता है। यह उन्‍हें अपनी पूरी क्षमता का उपयोग करने और विकास करने में सहायता करता है। औद्योगिक अनुशासन और संबंध में सुधार होने से अनुपस्थिति की दर और श्रम प्रतिफल कम होते हैं।

  • सहभागिता प्रबंधन :- यह प्रतिनिधित्‍व और प्राधिकार का विकेन्‍द्रीकरण सुकर बनाता है। प्रशिक्षण प्रबंधन प्रक्रिया को सम्‍बद्ध है। प्रशिक्षित कर्मचारी नए और चुनौतीपूर्ण कार्य करने के इच्‍छुक होते हैं। संगठन की स्थिरता और नम्‍यता में भी सुधार होता है।

परन्‍तु प्रशिक्षण केवल तब प्रभावी होता है जब इसकी उचित योजना बनाई जाती है और प्रभावी रूप से इसका निष्‍पादन किया जाता है। प्रशिक्षण प्रविधि कर्मचारियों के स्‍तर के लिए उपयुक्‍त हो, कार्य की प्रकृति और प्रशिक्षण का उद्देश्‍य सही हो। प्रशिक्षण की कुछ महत्‍वपूर्ण प्रविधियां निम्‍नलिखित हैं :-

  • कार्य के दौरान प्रशिक्षण :- इसके अधीन कर्मकार कार्यस्‍थल पर ही अपने पर्यवेक्षक द्वारा प्रशिक्षित होता है। यह प्रशिक्षण अपेक्षाकृत सस्‍ता और कम समय का होता है और इसके लिए अलग से उपकरण एवं आवास की आवश्‍यकता नहीं होती है। यह कार्य करते हुए सीखना प्रशिक्षण प्रक्रिया कहा जाता है। यह निम्‍नलिखित में से एक या अधिक रूप लेता है, अर्थात कोचिंग (यह ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा पर्यवेक्षक कार्य की दिनचर्या में पर्यवेक्षक कार्य का ज्ञान और कौशल पढ़ाता है); अध्‍ययनाधीन (इसके तहत प्रशिक्षु को अपने वरिष्‍ठ के उत्तराधिकारी के रूप में कार्य सौंपा जाता है और उसका भविष्‍य अपने वरिष्‍ठ के भविष्‍य पर निर्भर करता है); या कार्य चक्र (प्रशिक्षु को समय समय पर एक ही कार्य पर रखने की बजाए अलग अलग कार्यों में लगाया जाता है ताकि विभिन्‍न कार्य स्थिति में उसकी सामान्‍य पृष्‍ठभूमि का विस्‍तार किया जा सके)।

  • प्रकोष्‍ठ प्रशिक्षण :- इस प्रविधि के अधीन कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण केन्‍द्र (प्रकोष्‍ठ) में प्रशिक्षण दिया जाता है जो कार्यस्‍थल की वास्‍तविक कार्यपरिस्थिति की प्रतिकृति होता है। प्रशिक्षण सावधानी पूर्वक नियंत्रित शिक्षण परिस्थिति में योग्‍यताप्राप्‍त अनुदेशकों द्वारा दिया जाता है। यह करने के पहले सीखने की प्रक्रिया कहलाती है। यह उपयुक्‍त होता है जब बड़ी संख्‍या में लोगों को एक ही प्रकार के कार्य का प्रशिक्षण दिया जाता है। ऐसी प्रशिक्षण प्रविधि में कम समय लगता है और नियमित उत्‍पादन प्रक्रिया में यह बाधक नहीं बनती है। इसके अधीन प्रशिक्षु किसी कार्य के दबाव में नहीं होते हैं और इस प्रकार शिक्षण प्रक्रिया में दूरी तरह एकाग्र होते हैं।

  • शिक्षार्थन प्रशिक्षण :- इसके अधीन प्रशिक्षु शिक्षार्थी के रूप में कार्य करते हैं और प्रशिक्षण अवधि के दौरान कुछ वृत्ति का भुगतान किया जाता है। वे अमूल्‍य कौशल भी प्राप्‍त करते हैं जिसका श्रम बाजार में बहुत अधिक मूल्‍य है। इसके तहत प्रशिक्षु का नियोजन अनुभवी व्‍यक्ति के पर्यवेक्षाधीन किया जाता है जो उसे अनिवार्य कौशल सिखाता एवं उसके निष्‍पादन का प्रेक्षण करता है। ऐसा प्रशिक्षण उद्योगों में आशयित होता जिसके लिए नए और सस्‍ते कर्मचारियों की आवश्‍यकता होती है जिनसे बहुमुखी शिल्‍पकार बनने की उम्‍मीद की जाती है।

  • कक्षा प्रशिक्षण :- इसके अधीन, नियोक्‍ताओं और शैक्षिक संस्‍थाओं के संयुक्‍त प्रयास द्वारा प्र‍शिक्षुओं को सैद्धान्तिक अनुदेश दिए जाते है। विशेष पाठ्यक्रम का मुख्‍य उद्देश्‍य विशेष कार्य के विशिष्‍ट प्रभावी निष्‍पादन के लिए विशेष क्षेत्रों में विकसित ज्ञान प्रदान करना है। नियोक्‍ता अपने कर्मचारियों को प्रशिक्षण संस्‍थानों में भेजते हैं। संगठन की आवश्‍यकता की पूर्ति करने के लिए विशेष पाठ्यक्रम तैयार किए जाते हैं और अनुदेश के लिए व्‍याख्‍यान तरीके का उपयोग किया जाता है। ऐसा प्रशिक्षण वैसी जगह के लिए उपयुक्‍त होता है जहां गूढ़ ज्ञान, अभिकल्‍पना की स्‍पष्‍टता, समस्‍या का समाधान क्षमता सीखने की आवश्‍यकता होती है।

चूंकि प्रशिक्षण एक सतत प्रक्रिया है, प्रशिक्षण कार्यक्रम की प्रभावोत्‍पादकता का मूल्‍यांकन किया जाना चाहिए ताकि समय-समय पर इसमें आवश्‍यक सुधार किया जा सकता है। य‍ह प्रशिक्षण तब तक जारी रहता है जब तक संगठन व्‍यापार करता रहता है।

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संबंधित लिंक्‍स :
संबंधित लिंक्‍स राज्‍य सरकार प्रशिक्षण निदेशालय
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग का प्रशिक्षण प्रभाग
राष्‍ट्रीय प्रशिक्षण नीति
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग द्वारा प्रशिक्षक विकास कार्यक्रम
 
 
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