विदेशी भारतीयों को विश्व के सर्वाधिक सफल समुदायों में गिना जाता है। उन्होंने ज्ञान और नवाचार के पर्याप्त साधन जोड़कर अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दिए हैं। इनमें से अधिकांश अनिवासी भारतीय (एनआरआई), भारतीय मूल के व्यक्ति (पीआईओ) और विदेशी नैगम निकाय (ओसीबी) शामिल हैं। वे देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के महत्वपूर्ण स्रोत हैं। इस प्रकार वे भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न खण्डों के प्रगामी विकास में सहायता देते हैं।
भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा डायस्पोरा रखता है। विदेशी भारतीय समुदाय 25 मिलियन से अधिक आंका गया है जो विश्व के प्रत्येक मुख्य हिस्से में फैला है। यह ज्ञान की अभिगम्यता, विशेषज्ञता, संसाधन और मूल देश के विकास हेतु बाजार तक महत्वपूर्ण सेतु के रूप में कार्य करता है। भारत में विदेशी भारतीय कार्य मंत्रालय (एमओआईए) एक नोडल अभिकरण है जो विदेशी भारतीयों के लिए कार्य करता है। यह भारत के विकास से लाभ देने के लिए डायस्पोरा हेतु एक समेकित कार्यसूची का विकास करता है और साथ ही भारतीय डायस्पोरा नेटवर्कों की स्थापना के लिए एक मानचित्र भी बनाता है। यह अनेक भारतीय विदेशी नागरिकों के साथ पहलों में संलग्न है जो व्यापार और निवेश के प्रोत्साहन के संदर्भ में है। इसने विदेशी भारतीय सुविधा केन्द्र (ओआईएफसी) का भी गठन किया है जो निवेश तथा व्यापार संबंधी गतिविधियां करता है। यह प्रवासी भारतीय दिवस का आयोजन विदेशी भारतीयों को प्रोत्साहन देने के लिए करता है। जबकि राज्य / संघ राज्य क्षेत्र स्तर पर अनेक विशेष अनिवासी भारतीय प्रकोष्ठ या सुविधा केन्द्र है जो उद्योग बंधु या उद्योग मित्र या उद्योग विभाग के साथ विदेशी भारतीयों के कल्याण हेतु कार्य करते हैं।
भारत में विदेशी निवेश की विभिन्न विशेषताओं का अभिशासन करने वाला महत्वपूर्ण कानून विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) 1999 और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, (एफडीआई) नीति है। अधिनियम के अनुसार अनिवासी भारतीय ऐसे नागरिक है जो भारत के बाहर रहते हैं जबकि भारतीय मूल का व्यक्ति ऐसा व्यक्ति है जो (पाकिस्तान / बंगलादेश / श्रीलंका / अफगानिस्तान / चीन / इरान / नेपाल / भूटान का नागरिक नहीं है) जो :- (i) जिसके पास किसी भी समय भारतीय पासपोर्ट रहा हो; या (ii) जो स्वयं या उसके पिता अथवा पितामह भारतीय संविधान या नागरिकता अधिनियम 1955 के अनुसार भारत के नागरिक थे। जबकि ऐसी विभिन्न आर्थिक नीतियां और उद्योग सुविधा अधिनियम संबंधित राज्यों / संघ राज्य क्षेत्रों में हैं जो निवेशकों के लिए उपलब्ध व्यापार के विभिन्न अवसरों को परिभाषित करते हैं।
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