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तीव्र मीनू
 
Opportunities for Overseas Indians
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Opportunities for Overseas Indians वर्तमान परिदृश्‍य
Opportunities for Overseas Indians केन्‍द्रीय स्‍तर पर शासी रूपरेखा
Opportunities for Overseas Indians राज्‍य स्‍तर पर शासी रूपरेखा
Opportunities for Overseas Indians समस्‍याएं और प्रभाव
Opportunities for Overseas Indians सुझाव और भावी संभावनाएं
   
 
Opportunities for Overseas Indians
Opportunities for Overseas Indians
सुझाव और भावी संभावनाएं
दुनिया भर में भारतीय डायस्‍पोरा की संख्‍या, कद, संपत्ति और प्रभाव पिछले दशक में काफी बढ गया है। यह भारत के सर्वोत्तम हित में होगा कि अपने डायस्‍पोरा के साथ संलग्‍नता बनाए रखी जाए। एक प्रभावी और संगत रूप से ऐसा करने पर इस गतिशील समूह के सदस्‍य संख्‍या भारत में उभरते व्‍यापार तथा निवेश के अवसरों के लिए लाभकारी होगी और इससे भारत की भावी वृद्धि और विकास में योगदान मिलेगा।

आज डायस्‍पोरा को न केवल उसकी संपत्ति के लिए जाना जाता है बल्कि इसके ज्ञान, प्रौद्योगिकी और राजनैतिक तथा आर्थिक प्रभाव को भी कम नहीं माना जाना चाहिए। डायस्‍पोरा के विषय में ऐसे अनेक कारण है कि भारत को इसके साथ जुड़ने में गर्व का अनुभव होना चाहिए। भारत में वापस आने वाले अनिवासी भारतीयों तथा भारतीय मूल के व्‍यक्तियों के उदाहरण, उनकी बचत के निवेश और रोजगार उत्‍पादन अथवा उद्योग / समाज में उनकी अग्रणी स्थिति तथा उनकी तकनीकी जानकारी अब कुछ सामान्‍य विशेषताएं हैं। इसी प्रकार भारतीय निगम, डायस्‍पोरा की विशेषज्ञता को अंतरराष्‍ट्रीय बाजारों के दोहन हेतु और विश्‍व भर में उनकी छाप छोड़ने के लिए पूरी स्‍वतंत्रता देते हैं, अब ये दुर्लभ प्रशंसाएं नहीं रहीं।

इस परिदृश्‍य को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि अब हमने हिमशिला के शीर्ष को छू लिया है और अभी भारत और उसके डायस्‍पोरा के लिए काफी काम बाकी है ताकि इस संलग्‍नता को पूर्णता की ओर ले जाया जा सके। इसके लिए जरूरी है कि भारत अपने बाजार निरंतर डायस्‍पोरा के‍ लिए खोल दें और उनकी आसंजकता तथा सहक्रियात्‍मकता के दोहन से संभावी व्‍यापार के अवसरों का विकास किया जा सके।

अपने अनोखे ज्ञान और नेटवर्क के साथ भारतीय डायस्‍पोरा आपसी समझ को गहराई प्रदान करने, उत्‍पादक व्‍यापारिक भागीदारी बनाने तथा दुनिया भर में व्‍यापार तथा निवेश के प्रभावों को प्रोत्‍साहन देने में सहायता कर सकता है। इससे भारत तथा विश्‍व की अर्थव्‍यवस्‍थाओं के बीच गहरे संबंध बनाने में सहायता मिलेगी और इस प्रकार एक अधिक प्रतिस्‍पर्द्धी, उद्योग उन्‍मुख और सक्रिय संबंध विकसित करने में सहायता मिल सकेगी।

डायस्‍पोरा के साथ भारत की संलग्‍नता को गहरा करने के प्रयासों में भारत सरकार ने समाज सेवा, विकास, शिक्षा और निवेश में अनेक पहलें की हैं। विदेशी भारतीय कार्य मंत्रालय ने दुनिया भर में भारतीय समुदायों के साथ मेलजोल की पहले की हैं और साथ ही उनकी जड़ें प्राप्‍त करने में भी उन्‍हें सहायता दी है। पिछला वर्ष विदेशी भारतीय कार्य मंत्रालय के लिए महत्‍वपूर्ण रहा जब अनेक महत्‍वपूर्ण पहलें लाखों विदेशी भारतीय कामकारों के कल्‍याण पर लक्षित की गईं। भारत के भविष्‍य और विकास में भारतीय डायस्‍पोरा को शामिल करने की अनेक मुख्‍य पहलें की गई हैं। प्रधानमंत्री द्वारा प्रवासी भारतीय दिवस 2008 के अवसर पर चार प्रमुख पहलों की घोषणा की गई हैं।
  • 'भारत विकास फाउंडेशन (आईडीएफ)' की स्‍थापना जो लाभ के लिए नहीं है बल्कि यह भारत में डायस्‍पोरिक समाज सेवा के लिए केन्‍द्र बिंदु के रूप में कार्य करने वाला न्‍यास है। समाज सेवा एक आदर्श क्षेत्र है जहां अनेक नई भागीदारी निर्मित की जा सकती है, मौजूदा भागीदारियों को सुदृढ़ बनाया जा सकता है तथा उनकी परास और पहुंच को बढ़ाया जा सकता है। इन भागीदारियों को गति‍ प्रदान करने के लिए आईडीएफ न्‍यास द्वारा एक संस्‍थागत प्रक्रिया चलाई जाएगी जो विदेशी भारतीय समाज सेवा की प्रवृत्तियों को भारत में मानव विकास के प्रयासों में रूपांतरित करेगी। यह फाउंडेशन विदेशी भारतीयों को शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में अपने पूर्व घरेलू गांवों, जिलों या राज्‍यों में योगदान हेतु सहायता प्रदान करेगा। यह प्रतिष्ठित गैर सरकारी संगठनों और समाज सेवी संगठनों की भागीदारी से सामाजिक विकास में सक्रिय रूप से संलग्‍न होगा और इस प्रकार विदेशी भारतीयों और उनके लक्ष्‍य लाभार्थियों के बीच सार्वजनिक - निजी भागीदारी का एक सशक्‍त सेतु प्रदान करेगा।
  • भारतीय मूल के एक विश्‍वविद्यालय की स्‍थापना का प्रस्‍ताव पर सरकार के अनुमोदन के पश्‍चात विश्‍वविद्यालय के लिए एक मूल नीति रूपरेखा बनाई गई है। सार्वजनिक - निजी भागीदारी मॉडल के आधार पर बैंगलोर में स्‍थापित किए जाने वाले इस विश्‍वविद्यालय में शैक्षिक विषयों और शासन, दोनों के संदर्भ में स्‍वायत्तता और लचीलापन होगा।
  • सर्वोत्तम विदेशी भारतीय ज्ञान और विशेषज्ञता पर आधारित सरकार की ओर से मंत्रालय द्वारा प्रधानमंत्री की अध्‍यक्षता में एक वैश्विक सलाहकार परिषद की स्‍थापना का प्रस्‍ताव है। यह उच्‍च स्‍तरीय मंच कुछ सर्वोत्तम बुद्धिजीवियों को एक साथ लाएगा जहां वे एक विचार समूह के रूप में रह कर नीतियां बनाएंगे, जो भारत से संबंधित सभी मामलों पर होंगी, इसमें विदेशी भारतीय समुदाय की संलग्‍नता होगी।
  • 'प्रवासी भारतीय केन्‍द्र (पीबीके)' विदेशी भारतीयों के‍ लिए आधुनिकतम केन्‍द्र के रूप में कार्य करेगा। यह आधुनिकतम पर्यावरण अनुकूल केन्‍द्र होगा जहां एक प्रदर्शनी केन्द्र, एक पुस्‍तकालय और प्रलेखन केन्‍द्र, एक प्रेक्षागृह, एक व्‍यापार केन्‍द्र और अन्‍य ढेर सारी सुविधाएं होंगी और यह भारत में विदेशी भारतीयों की गतिविधि का केन्‍द्र होगा।
भारतीय डायस्‍पोरा भारत के ही समान विविध समुदाय है। इसमें विभिन्‍न भाषाएं बोलने वाले, विभिन्‍न मतों और क्षेत्रों के लोग शामिल हैं। निरंतर रूप से आपसी निर्भरता और आपस में जुड़े विश्‍व में विदेशी भारतीय 'वैश्विक नागरिक' बनते जा रहे हैं और आपस की मिली जुली संस्‍कृति और मान्‍यताओं के विचार से हम सभी एक साथ बंधे हुए हैं।

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