व्यापारी संगठन के स्वरूप का चयन व्यापारी उद्यम का स्वामित्व और संगठन विभिन्न रूपों में होता है। प्रत्येक संगठन रूप की अपनी कमी और खूबियां होती है। व्यवसाय के रूपों को अंतिम चयन विभिन्न रूपों के व्यापार के फायदे और नुकसान के संतुलन पर निर्भर करता है। कारोबार के स्वरूप का सही चयन बहुत महत्वपूर्ण है चूंकि यह अधिकार, नियंत्रण, जोखिम और उद्यमी की जिम्मेदारी और लाभ-हानि प्रभाग का उत्तरदायित्व निर्धारण करता है। दीर्घावधिक वचनबद्धता होने की वजह से व्यापार के स्वरूप का चयन काफी सोच समझकर विचार-विमर्श करने के बाद किया जाना चाहिए।
व्यापार के स्वरूप का चयन अनेकानेक परस्पर संबंधित और एक दूसरे पर आधारित कारकों के द्वारा शासित होता है :-
- कारोबार की प्रकृति अति महत्वपूर्ण कारक है। प्रत्यक्ष सेवाएं प्रदान करने वाले कारोबार जैसे दर्जी, रेस्तरां और व्यावसायिक सेवाएं जैसे डाक्टर, अधिवक्ता साधारणत: संबंधित कर्ता-धर्ता के रूप में संगाठित होते हैं। जबकि कौशल और निधि पूल वाले व्यापार और लेखाकरण कम्पनियां बेहतर रूप से साझेदारी के रूप में संगठित होती है। बड़े आकार के विनिर्माण संगठन सामान्यत: निजी और सार्वजनिक सम्पनियों के रूप में स्थापित होते हैं।
- कार्यचालन का स्केल अर्थात कारोबार की मात्रा (बड़ा, मध्यम, लघु) और बाजार क्षेत्र का आकार (स्थानीय, राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय) मुख्य कारक हैं। बड़े उद्यम जो राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों की आपूर्ति करते हैं जो निजी या सार्वजनिक कम्पनियों के रूप में सफलतापूर्वक संगठित होते हैं। लघु और मध्यम आकार के फर्म साधारणत: साझेदारी और प्रोपराइटरशिप के रूप में स्थापित किए जाते हैं। इसी प्रकार जहां कार्य क्षेत्र विस्तृत होता है (राष्ट्रीय या अंतराष्ट्रीय) कम्पनी स्वामित्व उपयुक्त होता है। परन्तु यदि कार्य क्षेत्र एक स्थान विशेष तक सीमित होता है, साझेदारी या प्रोपराइटरशिप अपेक्षाकृत अधिक उपयुक्त विकल्प होगा।
- स्वामी द्वारा इच्छित नियंत्रण को डिग्री/एक व्यक्ति जो कारोबार के प्रत्यक्ष नियंत्रण की इच्छा रखता है वह प्रोपराइटरशिप पसन्द करता हैं चूंकि कम्पनी में स्वामित्व और प्रबंधन का पृथक्कीकरण सन्निहित होते हैं।
- कारोबार की स्थापना और कार्यचालन के लिएआवश्यक पूंजी की राशि/साझेदारी को कम्पनी में परिवर्तित किया जा सकता है जब यह कुछ व्यक्तियों की क्षमता और संसाधनों से अधिक विकसित हो जाता है।
- जोखिमों और दायित्वों की मात्रा और इसे वाहन करने की स्वामी की इच्छा भी महत्वपूर्ण बात है।
- तुलनात्मक कर दायित्व।
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