व्यक्तियों पर आयकर लगेगा। आय कर व्यवसाय सत्ताओं के अन्य रूपों पर अथवा व्यक्तियों, निगमों द्वारा उपार्जित आय कर वसूल किया गया प्रत्यक्ष कर होता है। भारतीय संविधान ने आय कर की वसूली करने व उसे एकत्रित करने के लिए केवल केंद्र सरकार को ही शक्ति प्रदत्त की है। सरकार द्वारा गठित
आयकर विभाग को
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) द्वारा शासित किया जाता है। सीबीडीटी
वित्त मंत्रालय में
राजस्व विभाग का एक भाग है। इसे भारत में विभिन्न प्रत्यक्ष कर से संबंधित सभी मामलों का प्रभार दिया गया है। यह भारत में प्रत्यक्ष करों की नियोजना व नीति के लिए अनिवार्य इनपुट प्रदान करता है और यह आयकर विभाग के माध्यम से प्रत्यक्ष कर कानून के प्रशासन हेतु भी जिम्मेदार है। आयकर में संबंधित सभी मामलों के लिए,
आयकर अधिनियम 1961 अम्ब्रेला अधिनियम है जो केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड को अधिनियम के प्रावधानों को कार्यान्वित करने के लिए नियम (
आय कर नियमावली 1962) बनाने की शक्ति प्रदत्त करता है।
आयकर अधिनियम में यह प्रावधान है कि प्रत्येक व्यक्ति की पूर्व वर्ष की कुल आय के संबंध में, आयकर उस निर्धारण वर्ष के लिए वित्त अधिनियम द्वारा निर्धारित दरों पर तदनुरूपी निर्धारण वर्ष के लिए वसूल (चार्ज) किया जाएगा। अन्य शब्दों में, एक वर्ष में उपार्जित आय अगले वर्ष में कर योग्य होती है और निर्धारण वर्ष के लिए निर्धारित आयकर दरें पूर्व वर्ष के दौरान उपार्जित आय के संबंध में लागू होती है।
नोट कीजिए कि :- जिस वित्तीय वर्ष में आय उपार्जित की जाती है, उसे पूर्व वर्ष कहा जाता है। पूर्व वर्ष के बाद आने वाले वित्तीय वर्ष को निर्धारण वर्ष के रूप में जाना जाता है। निर्धारण वर्ष वह वर्ष होता है, जिसमें पूर्व वर्ष में उपार्जित वेतन कर योग्य होता है। कोई भी वित्तीय वर्ष प्रत्येक वर्ष की 1 अप्रैल से आरंभ होता है और उत्तरवर्ती वर्ष की 31 मार्च को समाप्त होता है।
नए शुरू किए गए कार्य व्यापार अथवा व्यवसाय की स्थिति में, व्यक्ति के वर्तमान निर्धारित होने तक, पूर्व वर्ष नया कार्य – व्यापार अथवा व्यवसाय शुरू होने की तारीख से अगली 31 मार्च तक शुरू होता है।
आय कर अधिनियम के अनुसार प्रत्येक वर्ष केंद्र बजट में वार्षिक संशोधन किए जाते है। वजट में वित्त बिल में विभिन्न संशोधन किए जाते हैं, जिनका केंद्र सरकार द्वरा वसूल किए गए प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष कर में पता लगाया जाता है। बिल में आय कर व अन्य करों भी दरों का भी उल्लेख किया जाता है। एक बार अनुमोदित किया गया बिल वित्त अधिनियम बन जाता है और उसमें दिए गए प्रावधानों को आयकर अधिनियम में शामिल किया जाता है।