| कारोबार एक राष्ट्र के आर्थिक विकास और वृद्धि को टिकाऊ बनाए रखने का एक अपरिवर्तनीय साधन है। भारत मे विदेशी कारोबार को अभिशासित करने वाला मुख्य विधान है विदेशी कारोबार (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1992। अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार भारत सरकार विदेशी कारोबार नीति तैयार करती है और समय-समय पर इसे संशोधित करती है। नई विदेशी कारोबार नीति (एफटीपी) की घोषणा अगस्त 2004 में की गई, जिसमें वर्ष 2004-2009 की अवधि शामिल है, भारत के विदेशी कारोबार क्षेत्र के समग्र विकास के लिए एक व्यापक नीति है। यह दो मुख्य उद्देश्यों के आसपास निर्मित की गई है : (i) अगले पांच वर्षों में वैश्विक मर्चेंडाइस कारोबार की प्रतिशत भागीदारी को दो गुना करना; और (ii) रोजगार उत्पादन को बल देकर कारोबार में आर्थिक वृद्धि के एक प्रभावी साधन के रूप में कार्य करना।
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय भारत में विदेशी कारोबार के प्रवर्तन और विनियमन से जुड़ा सबसे अधिक महत्वपूर्ण अंग है। मंत्रालय में कारोबार के विभिन्न पक्षों की देखभाल के लिए एक विशाल संगठनात्मक व्यवस्था है। कारोबार से संबंधित इसके दो महत्वपूर्ण कार्यालय हैं : ''विदेशी कारोबार महानिदेशालय (डीजीएफटी)'' और ''वाणिज्यिक बुद्धिमत्ता महानिदेशालय'' (डीजीसीआई एण्ड एस)। डीजीएफटी भारतीय निर्यातकों को प्रोत्साहन देने के मुख्य उद्देश्य सहित विदेशी कारोबार नीति/आयात-निर्यात नीति के कार्यान्वयन के लिए उत्तरदायी है। यह निर्यातकों को लाइसेंस जारी करता है और क्षेत्रीय कार्यालयों के नेटवर्क के माध्यम से इनकी संगत बाध्यताओं की निगरानी की जाती है। डीजीसीआई एण्ड एस को नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं, आयातकों, कारोबारियों के साथ विदेशी ग्राहकों द्वारा आवश्यक पाई गई विभिन्न प्रकार की सूचना और कारोबार सांख्यिकी के संग्रहण, संकलन और प्रकाशन/प्रसार का कार्य सौंपा गया है।
भारत बहु-पार्श्वीय, क्षेत्रीय और द्विपक्षीय स्तरों पर कारोबारी बातचीत और करारनामों में भी संलग्न है। यह विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ), यूनाइटेड नेशनल कॉन्फरेंस ऑन ट्रेड एण्ड डेवलपमेंट (यूएनसीटीएडी), एशिया और प्रशांत हेतु आर्थिक और सामाजिक (एस्केप) आदि जैसे अंतरराष्ट्रीय अभिकरणों के साथ मिलकर कार्य करता है और साथ ही यह टेरिफ और गैर-टेरिफ बाधाओं सहित देशों के समूह या अलग-अलग देशों के साथ विचार विमर्श करता है, अंतरराष्ट्रीय वस्तु करारनामे, अधिमानी/मुक्त व्यापार करारनामे, निवेश के मामले आदि। कुछ प्रमुख क्षेत्रीय कारोबारों की व्यवस्था, जिनमें शामिल हैं : दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र करारनाम (एसएएफटीए); एशिया-प्रशांत कारोबार करारनामा (एपीटीए); आसियान और भारत आदि के बीच विस्तृत आर्थिक सहयोग पर करारनामे आदि रूपरेखा आदि।
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